नई दिल्ली। करवन जिसे करौंदा भी कहते हैं। यह एक कांटेदार पौधा होता है, जिसे आयुर्वेद में औषधीय गुणों का भंडार कहा गया है। इसके कच्चे फल हरे रंग के होते हैं, लेकिन पकने पर गहरे लाल या काले हो जाते हैं। करवन के छोटे फलों का स्वाद खट्टा होता है, इसलिए इससे अचार, चटनी और जैम जैसी तमाम सामग्रियां तैयार की जाती हैं। यह स्वाद के साथ-साथ कई पोषक तत्वों का खजाना है।
करवन पकने के बाद पाचन, भूख बढ़ाने और शरीर को ऊर्जा देने वाले गुणों से युक्त बन जाता हैं। इसके फल, जड़ और पत्तों में कई औषधीय गुण होते हैं। इसकी जड़ कृमिनाशक है, जबकि जड़ की छाल कफ और वात संबंधी समस्याओं में लाभकारी है। यह शरीर की जलन, पाचन सुधारने और सामान्य कमजोरी दूर करने में भी सहायक है। यह पारंपरिक चिकित्सा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, करवन दांत और मसूड़ों के लिए भी लाभकारी है। इसमें पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्कर्वी जैसी समस्याओ को दूर करते हैं। सूखी खांसी होने पर करवन/करौंदे के पत्तों के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से गले को राहत मिलती हैं।
करवन के कच्चे सूखे फल और जड़ के चूर्ण का उपयोग करने से दस्त, पेट के कीड़े और अन्य पेट संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलती हैं। पके करौंदे के चूर्ण का सेवन करने से अधिक प्यास लगने की समस्या कम होती हैं। अधिक भोजन करने या एसिडिटी के कारण होने वाले पेट दर्द में इसके फूल या जड़ का उपयोग फायदेमंद है।
पेशाब के दौरान जलन या दर्द होने पर करवन की जड़ का उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। पेट में पानी भरने जैसी समस्या में भी करौंदे के पत्तों के रस का सेवन किया जा सकता है। महिलाओं में अधिक रक्तस्राव और मासिक धर्म से जुड़ी कुछ समस्याओं में भी इसकी जड़ का उपयोग बेहद उपयोगी बताया गया है।
करवन का उपयोग त्वचा संबंधी समस्याओं में असरदार है। इसके पके फल या जड़ का लेप खुजली, जलन और अन्य त्वचा विकारों में लगाया जाता है। बुखार में इसके पत्तों का काढ़ा बहुत लाभकारी हो सकता हैं। फटी एड़ियों पर इसके बीजों का लेप लगाया जा सकता हैं। मिर्गी के लक्षणों में भी करौंदे के पत्ते लाभकारी हो सकते हैं। लेकिन डॉक्टर की राय जरूरी है।
करौंदे के पत्ते, जड़ और फल सबसे अधिक उपयोगी होते हैं। इसका सेवन ताजे फल, चटनी, अचार, चूर्ण या काढ़े के रूप में किया जा सकता है। औषधीय उपयोग के लिए इसकी मात्रा व्यक्ति की उम्र, समस्या और रोग के आधार पर अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी बीमारी में इसे घरेलू इलाज के रूप में अपनाने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक का परामर्श जरूर लेना चाहिए।
यह कई गुणों से भरपूर होता है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए यह फ़ायदेमंद ही होगा ये जरूरी नहीं है। गठिया, गाउट, साइटिका और पेट के अल्सर से पीड़ित लोगों को इसका सेवन सावधानी से ही करने की सलाह दी जाती है। संतुलित आहार, चिकित्सकीय सलाह और सही मात्रा में करौंदे का सेवन ही सुरक्षित और लाभकारी हो सकता हैं।
Trending
- भिलाई स्टील प्लांट स्क्रैप महाघोटाला: जीएम और एजीएम समेत दो बड़े अधिकारी गिरफ्तार
- क्यों शिव भक्तों पर कभी भारी नहीं पड़ती ‘शनि की वक्र दृष्टि’? जानिए महादेव और न्यायदेव के संबंधों का पूरा रहस्य
- बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट: ‘वेलकम टू द जंगल’ 125 करोड़ के पार, ‘अल्फा’ की कमाई में गिरावट, जानें बाकी फिल्मों का हाल
- करौंदा क्यों माना जाता है आयुर्वेद का सुपरफूड? जानें इसके औषधीय गुण
- बेमेतरा में सनसनी: चादर में लिपटी महिला की टुकड़ों में मिली लाश, इलाके में दहशत का माहौल
- छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिन बरसेंगे बदरा! बस्तर समेत 13 जिलों में अलर्ट जारी
- कोरबा में दर्दनाक हादसा: मां को लगी झपकी और नदी में डूबने से 2 साल के मासूम की मौत
- जांच एजेंसियों की कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस करेगी प्रदर्शन


