14 महिलाओं को दिया रोजगार और आत्मनिर्भरता का संबल
खबर वर्ल्ड न्यूज-सूरजपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब ठोस परिणामों के रूप में सामने आ रहे हैं। राज्य में स्व-सहायता समूह आधारित पहलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं।
इसी कड़ी में सूरजपुर जिले के सिलफिली गांव की मालती विश्वास ने अपनी लगन, मेहनत और दृढ़ संकल्प से एक प्रेरणादायक मुकाम हासिल किया है। आज वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में जानी जाती हैं और अपने साथ 14 अन्य महिलाओं को रोजगार देकर सामूहिक सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।
घर की चौखट से उद्यमिता की ऊंचाइयों तक
कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली मालती विश्वास आज एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। बचपन से सिलाई-कढ़ाई में रुचि रखने वाली मालती ने अपनी माँ की प्रेरणा से स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की नई शुरुआत की।
समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल शासकीय योजनाओं की जानकारी मिली, बल्कि आर्थिक सहायता के अवसर भी प्राप्त हुए। उन्होंने 1 लाख रुपए का ऋण लेकर बुटीक व्यवसाय की शुरुआत की और अपने हुनर को आय के स्थायी स्रोत में बदल दिया।
साहसिक विस्तार से मिली नई पहचान
अपने कार्य के प्रति समर्पण और ग्राहकों के बढ़ते विश्वास ने मालती को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने 5 लाख रुपए का ऋण लेकर अपने व्यवसाय का विस्तार किया और बुटीक के साथ-साथ श्रृंगार सामग्री एवं वस्त्र व्यापार को भी जोड़ा।
आज उनका उद्यम एक सशक्त व्यवसाय के रूप में विकसित हो चुका है, जो न केवल उनकी आय का प्रमुख स्रोत है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का माध्यम बना हुआ है।
14 महिलाओं के जीवन में लाई खुशहाली
मालती विश्वास के साथ जुड़ी 14 महिलाएं आज सिलाई, कढ़ाई एवं अन्य कार्यों के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है और वे आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर रही हैं।
यह पहल केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, सामाजिक भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता को भी सशक्त बना रही है।
सरकारी योजनाएं बनीं बदलाव की आधारशिला
मालती विश्वास अपनी सफलता का श्रेय राज्य सरकार की योजनाओं एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को देती हैं। उनका मानना है कि यदि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।


