नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के जंगलों में पाया जाने वाला कीकर, जिसे स्थानीय भाषा में जंगल जलेबी के नाम से जाना जाता है, इन दिनों शहरों के बाजारों में खासा लोकप्रिय हो रहा है। खट्टी-मीठी स्वाद वाला यह जंगली फल न केवल लोगों की जुबान पर चढ़ रहा है बल्कि आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं के लिए आय का साधन भी बनते जा रहा है। सीधी जिले के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में इसकी भरपूर पैदावार होती है। यह केवल दो महीने ही मिलती है। पुराने बस स्टैंड के पास जंगल जलेबी बेचने वाली फूलमती गोंड लोकल 18 को बताती हैं कि पहले वह जंगल से लकड़ियां इकट्ठा कर बेचती थीं, जिससे कम आमदनी होती थी और मेहनत भी ज्यादा लगती थी लेकिन अब जंगल जलेबी के कारण उन्हें बेहतर और सुरक्षित आय का विकल्प मिल गया है। उनका कहना है कि इस काम में जोखिम कम है और कम समय में ज्यादा कमाई हो जाती है।
फूलमती ने बताया कि वह रोज सुबह तड़के जंगलों में जाकर जंगल जलेबी तोड़ती हैं और दोपहर तक शहर के मुख्य बाजार में बेचने पहुंच जाती हैं। बाजार में इसकी कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो है। इससे उन्हें प्रतिदिन 400 से 500 रुपये तक की कमाई हो जाती है, जिससे परिवार का खर्च और बच्चों की पढ़ाई में अच्छी मदद मिल रही है।
सेहत के लिए फायदेमंद जंगल जलेबी
आयुर्वेदिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ आरपी परौहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गर्मी के मौसम में मिलने वाली जंगल जलेबी का सेवन शरीर के लिए बेहद लाभकारी होता है। इसके नियमित सेवन से इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है, त्वचा रोगों में राहत मिलती है, आंखों की रोशनी बेहतर होती है और शुगर नियंत्रण में मदद मिलती है। साथ ही यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी सहायक है। उन्होंने बताया कि यह फल शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का काम करता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
औषधीय गुणों को लेकर जागरूक हैं शहरी लोग
वहीं ग्रामीण इलाकों में अभी भी इस फल को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता लेकिन शहरों में इसके स्वाद और औषधीय गुणों को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते जंगल जलेबी अब आदिवासी महिलाओं के लिए आय का बेहतर साधन बनती जा रही है। यह फल उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
Trending
- सुशासन तिहार बना आजीविका का मजबूत सहारा
- मंत्री केदार कश्यप ने मर्दापाल में ₹1 करोड़ 2 लाख के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन
- बदलते बस्तर की नई तस्वीर: 21 साल का लंबा संघर्ष पूरा, रावघाट पहुंची ट्रेन; आत्मसमर्पित नक्सलियों ने किया पहला रेल सफर
- कुरुषपाल सुशासन तिहार में प्राप्त हुए 236 आवेदन, 36 लाख के विकास कार्यों की मिली सौगात
- पेयजल की नियमित जलापूर्ति और शुद्धता की जांच जरूरी- मुख्य सचिव
- छत्तीसगढ़ बना कृषि सुधारों का राष्ट्रीय मॉडल: मंत्री रामविचार नेताम
- अबूझमाड़ में महुआ प्रसंस्करण के लिए बनेगा जनजातीय सहकारी मॉडल, संग्राहकों को हो रहा है सीधा ऑनलाइन भुगतान
- लाल आतंक को पछाड़ विकास की ओर बढ़ा दारेली: 40 साल बाद गांव पहुंचा प्रशासन, पहली बार हुई जनगणना


