नई दिल्ली। गर्मी का सीजन शुरू हो गया है और इस मौसम में कई तरह के फल और सब्जियां बाजार में आने लगती हैं। भीलवाड़ा के लोग भी अपनी सेहत का खास ध्यान रखते हुए इन फलों का सेवन करते हैं, ताकि गर्मी में स्वास्थ्य बना रहे। गर्मी की शुरुआत होते ही मेवाड़ अंचल के पहाड़ी इलाकों से एक खास जंगली फल बाजार में दिखाई देने लगता है, जिसे टिमरू के नाम से जाना जाता है। यह फल अपनी सीमित उपलब्धता और औषधीय गुणों के कारण लोगों के बीच खास पहचान रखता है। टिमरू केवल 10 से 12 दिनों के लिए ही बाजार में बिकता है, जिससे इसकी मांग काफी ज्यादा रहती है। स्थानीय लोग सालभर इस फल का इंतजार करते हैं और जैसे ही यह बाजार में आता है, इसे खरीदने के लिए उमड़ पड़ते हैं। यह फल न केवल स्वाद में अनोखा होता है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है, जो इसे अन्य फलों से अलग बनाता है।
मेवाड़ के पहाड़ी और जंगलों वाले इलाकों, खासकर बेगूं क्षेत्र में टिमरू का पेड़ प्राकृतिक रूप से उगता है। इसे बाजार तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को जंगलों में जाकर इसे तोड़कर लाना पड़ता है। भीलवाड़ा सहित आसपास के शहरों में इसे बेचने वाले लोग बताते हैं कि यह फल बहुत सीमित समय के लिए ही मिलता है, इसलिए इसकी खास पहचान बनी हुई है। टिमरू का रंग पीला और नारंगी होता है और यह देखने में आकर्षक लगता है। प्राकृतिक रूप से मिलने के कारण यह फल लोगों के बीच एक खास आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
स्वाद की बात करें तो टिमरू खट्टा-मीठा होता है, जो गर्मी के मौसम में शरीर को ताजगी देता है। यह फल दो अलग-अलग प्रकारों में पाया जाता है और पकने के बाद इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। लोग इस फल को गर्मी से बचाव के लिए खास तौर पर खाते हैं। उनका मानना है कि घर से बाहर निकलने से पहले टिमरू खाने से शरीर को गर्म हवाओं के प्रभाव से राहत मिलती है। यही कारण है कि यह फल केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि पारंपरिक जीवनशैली का भी एक अहम हिस्सा बन चुका है।
अगर इसके पोषक तत्वों की बात करें तो टिमरू किसी सुपरफूड से कम नहीं है। इसमें कॉपर, पोटैशियम, सोडियम, कैल्शियम, आयरन, जिंक, मैंगनीज, विटामिन E, विटामिन K और सेलेनियम जैसे कई जरूरी तत्व पाए जाते हैं। ये सभी तत्व शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे व्यक्ति कम बीमार पड़ता है। यही वजह है कि इसे प्राकृतिक औषधीय फल भी कहा जाता है।
टिमरू खासतौर पर डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है और शरीर में संतुलन बनाए रखता है। इसके अलावा यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी सहायक होता है, जिससे नजर कमजोर होने की समस्या में राहत मिलती है। पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, अपच और कब्ज में भी यह फल बेहद लाभकारी है। साथ ही यह शरीर में सूजन को कम करने और वजन घटाने में भी मदद करता है।
बाजार में इसकी कीमत लगभग 100 रुपये प्रति किलो के आसपास रहती है, लेकिन इसकी सीमित उपलब्धता के कारण लोग इसे बिना मोलभाव के खरीदना पसंद करते हैं। टिमरू केवल एक फल नहीं, बल्कि गर्मी के मौसम में मिलने वाला एक प्राकृतिक वरदान है, जो स्वाद और सेहत दोनों का अनोखा संगम पेश करता है। इसकी खासियत यही है कि यह सालभर नहीं मिलता, बल्कि कुछ ही दिनों के लिए बाजार में आता है और लोगों को अपने फायदे पहुंचाकर चला जाता है। यही वजह है कि टिमरू को मेवाड़ क्षेत्र में एक अनमोल फल माना जाता है।
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