नई दिल्ली। बिहार में सत्ता परिवर्तन की सुगराहट अब एक ठोस निर्णय में बदल चुकी है। एनडीए विधानमंडल दल की बैठक में सर्वसम्मति से सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगा दी गई है। सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह रहा जब निर्वतमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं सम्राट चौधरी का स्वागत किया और उन्हें अपना ‘उत्तराधिकारी’ स्वीकार करते हुए बिहार की बागडोर सौंपी।
शपथ ग्रहण समारोह का विवरण
-
तिथि: कल (निर्धारित तिथि के अनुसार)
-
समय: सुबह 11:00 बजे
-
स्थान: राजभवन, पटना
-
मुख्य आकर्षण: सम्राट चौधरी के साथ एक नई कैबिनेट भी शपथ लेगी, जिसमें एनडीए के घटक दलों (भाजपा, जदयू और अन्य) का प्रतिनिधित्व होगा।
संख्या बल: बिहार विधानसभा की स्थिति
बिहार विधानसभा में बहुमत के लिए 122 सीटों की आवश्यकता होती है। एनडीए गठबंधन के पास वर्तमान में स्पष्ट बहुमत है, जो इस नई सरकार को स्थिरता प्रदान करता है।
| राजनीतिक दल / गठबंधन | सीटों की संख्या (अनुमानित) |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 78 |
| जनता दल यूनाइटेड (JDU) | 45 |
| हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) | 04 |
| निर्दलीय व अन्य (NDA समर्थक) | 01 |
| कुल NDA (बहुमत) | 128 |
| विपक्षी गठबंधन (Mahagathbandhan) | 115 |
सम्राट चौधरी: राजनीतिक कद और चुनौतियाँ
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री चुना जाना बिहार की राजनीति में ‘ओबीसी (OBC) कार्ड’ और ‘युवा नेतृत्व’ के समन्वय के रूप में देखा जा रहा है। उनके सामने कुछ प्रमुख कार्य होंगे:
-
प्रशासनिक कसावट: नीतीश कुमार के लंबे शासन के बाद नए विजन के साथ शासन को आगे बढ़ाना।
-
गठबंधन समन्वय: भाजपा और जदयू के बीच वैचारिक और प्रशासनिक तालमेल बनाए रखना।
-
आगामी चुनाव: 2025 के विधानसभा चुनावों के लिए एनडीए को जमीन पर मजबूत करना।
विशेष नोट: नीतीश कुमार द्वारा सम्राट चौधरी को अपना “उत्तराधिकारी” कहना इस बात का संकेत है कि बिहार की राजनीति अब एक बड़े बदलाव की ओर है, जहाँ पुराने समाजवाद और नई पीढ़ी की भाजपाई रणनीति का मेल देखने को मिलेगा।


