खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर। रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कथित आबकारी घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लंबे समय से जेल में बंद निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) अधिकारी सौम्या चौरसिया और उनके सहयोगी केके श्रीवास्तव बुधवार को रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव रहीं सौम्या चौरसिया की यह रिहाई प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
गिरफ्तारी से रिहाई तक का सफर
सौम्या चौरसिया को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिसंबर 2022 में गिरफ्तार किया था। उन पर कोयला परिवहन में अवैध उगाही और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे थे। बाद में, आबकारी मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने भी उन्हें अपनी जांच के दायरे में लिया।
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हिरासत की अवधि: सौम्या चौरसिया लगभग 16 महीने (500 से अधिक दिन) जेल में रहीं।
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जांच एजेंसियां: पहले ED और उसके बाद EOW ने उन पर शिकंजा कसा।
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रिहाई का समय: माननीय न्यायालय से जमानत मिलने के बाद बुधवार शाम वे रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हुईं।
कौन हैं सौम्या चौरसिया?
सौम्या चौरसिया को छत्तीसगढ़ की पिछली सरकार के दौरान प्रदेश की सबसे शक्तिशाली नौकरशाहों में से एक माना जाता था।
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पद: पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव (निलंबित SAS अधिकारी)।
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प्रभाव: शासन और प्रशासन के नीतिगत निर्णयों में उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी।
सह-आरोपी केके श्रीवास्तव (तांत्रिक)
सौम्या चौरसिया के साथ ही तांत्रिक के रूप में चर्चित केके श्रीवास्तव को भी बड़ी राहत मिली है।
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आरोप: उन पर आबकारी घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं में बिचौलिए की भूमिका निभाने का आरोप है।
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जमानत: उन्हें भी आबकारी मामले में कोर्ट से राहत मिलने के बाद सौम्या के साथ ही रिहा किया गया है।


