खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर। कहते हैं कि यदि इरादे फौलादी हों और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। झारखंड के रामगढ़ जिले के एक छोटे से गाँव सुगिया के रहने वाले युवा पहलवान अंजित कुमार मुंडा ने इस बात को सच कर दिखाया है। अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में आयोजित ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ के दौरान अंजित ने 67 किलोग्राम भार वर्ग की कुश्ती स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
मात्र 20 वर्ष की आयु में सफलता के शिखर को छूने वाले अंजित का जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। वर्ष 2009 में पिता के साये के उठ जाने के बाद, उनकी माता ने खेती-बारी और कठिन परिश्रम के बल पर परिवार को संभाला। अंजित ने वर्ष 2017-18 में कुश्ती की शुरुआत की और जेएसएसपीएस स्पोर्ट्स अकादमी में लगभग 6 वर्षों तक कड़ा अभ्यास किया। उनकी शारीरिक क्षमता और तकनीक को देखते हुए प्रशिक्षकों ने उन्हें कुश्ती के लिए तराशा।
भारतीय सेना में ‘अग्निवीर’ के रूप में दे रहे हैं सेवाएं
अंजित की खेल प्रतिभा और देश सेवा के जज्बे ने उन्हें भारतीय सेना तक पहुँचाया। पिछले वर्ष ही उनका चयन ‘अग्निवीर जीडी’ के पद पर हुआ है। अपनी इस सफलता का श्रेय वे अपने कोच को देते हैं।
जनजातीय प्रतिभाओं के लिए बड़ा मंच
अपनी जीत पर खुशी जाहिर करते हुए अंजित मुंडा ने कहा, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स हम जैसे जनजातीय बच्चों के लिए एक उत्कृष्ट मंच है, जो अक्सर मुख्यधारा से पीछे छूट जाते हैं। पहली बार आयोजित इस प्रतियोगिता में गोल्ड जीतना मेरे लिए गर्व की बात है। अब मेरा अगला लक्ष्य छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाली आगामी प्रतियोगिताओं में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।”
उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद
पूर्व में कांस्य पदक जीतने के कारण छात्रवृत्ति से वंचित रहे अंजित को अब स्वर्ण पदक जीतने के बाद केंद्र सरकार से सहयोग और स्कॉलरशिप मिलने की पूरी उम्मीद है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें। अम्बिकापुर में चल रहे खेलों इंडिया ट्राइबल गेम्स में अंजित की यह उपलब्धि न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के जनजातीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।
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