खबर वर्ल्ड न्यूज-संतोष पाठक-मुंगेली। 21 मार्च को दोपहर 2 बजे सरस्वती शिशु मंदिर पेंडाराकापा में एक महत्वपूर्ण प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी के मुख्य वक्ता कैलाश चंद्र (मध्य क्षेत्र के क्षेत्र प्रचार प्रमुख) रहे। उन्होंने सामाजिक एवं राष्ट्रीय विचारों पर विस्तृत मार्गदर्शन देते हुए उपस्थितजनों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “जिस बात से दूसरे को कष्ट हो, वही पाप है और जिससे दूसरे को प्रसन्नता मिले, वही पुण्य है।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ज्ञानी व्यक्ति को परिस्थितियों का सूक्ष्म अवलोकन करते हुए समाजहित में कार्य करना चाहिए। “परहित सरिस धर्म नहीं भाई” का संदेश देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म केवल बाह्य चिन्ह नहीं, बल्कि आचरण और स्वभाव में धारण करने योग्य तत्व है, जो वैज्ञानिक एवं वृत्ति आधारित है।
उन्होंने समाज में सकारात्मक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सज्जन शक्ति को संगठित होकर कार्य करना होगा। “चार लोग मिलकर पूरी बस्ती का परिवर्तन कर सकते हैं” इस विश्वास के साथ उन्होंने एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। महापुरुषों, संतों एवं बलिदानियों के आदर्शों को स्मरण करते हुए समाज को संगठित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में उन्होंने “भूमि सुपोषण अभियान” का उल्लेख करते हुए कहा कि जमीन से प्लास्टिक हटाना हम सभी की जिम्मेदारी है। वर्तमान समय में समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलकर बेहतर कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में हुई थी। संघ के माध्यम से व्यायाम, अनुशासन एवं निस्वार्थ भाव से समाज सेवा का संस्कार विकसित किया जाता है। उन्होंने कहा कि शाखा का मूल चिंतन महापुरुषों के विचारों को आत्मसात करते हुए समाज के लिए कार्य करना है।
उन्होंने यह भी बताया कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों—अधिवक्ता, मजदूर, चिकित्सा, शिक्षा आदि—में सेवा कार्यों हेतु अनेक संगठन सक्रिय हैं। कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य बोध एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे पंच परिवर्तन के माध्यम से व्यापक सामाजिक परिवर्तन संभव है।
गोष्ठी में मातृछाया के सेवा कार्यों का भी उल्लेख किया गया, जो भोपाल से प्रारंभ होकर बिलासपुर सहित विभिन्न स्थानों पर संचालित है, जहाँ अनेक जरूरतमंद बच्चों को संरक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के अंत में समाज के सभी वर्गों से आग्रह किया गया कि वे अहंकार त्यागकर, साथ मिलकर, राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए कार्य करें। “जो तुझमें है, वो मुझमें है — यही हिंदुत्व है” के संदेश के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।
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