खबर वर्ल्ड न्यूज-प्रिया पाठक-रायपुर। राजधानी के पॉश इलाके पंडरी स्थित एक प्रमुख मॉल में सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। ओडिशा से आए एक पर्यटक परिवार को उस वक्त गहरा सदमा लगा, जब मॉल की वैलेट पार्किंग को सौंपी गई उनकी कीमती Innova कार खुद ड्राइवर ही लेकर फरार हो गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ओडिशा का एक परिवार दोपहर के वक्त शॉपिंग के इरादे से मॉल पहुंचा था। प्रवेश द्वार पर मॉल की अधिकृत वैलेट सर्विस का उपयोग करते हुए उन्होंने अपनी कार स्टाफ के हवाले की। लेकिन जब परिवार खरीदारी कर लौटा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वैलेट काउंटर पर उन्हें बताया गया कि उनकी गाड़ी वहां नहीं है। प्रारंभिक पड़ताल में पता चला कि जिस ड्राइवर को गाड़ी पार्क करने की जिम्मेदारी दी गई थी, वही वाहन लेकर चंपत हो चुका है।
सुरक्षा पर खड़े होते 5 बड़े सवाल
इस घटना ने न केवल मॉल प्रबंधन की कार्यप्रणाली को बेनकाब किया है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा मानकों पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं:
-
स्टाफ वेरिफिकेशन का अभाव: क्या वैलेट एजेंसी ने ड्राइवर की भर्ती से पहले उसका पुलिस वेरिफिकेशन और बैकग्राउंड चेक किया था?
-
CCTV की सुस्ती: मॉल जैसे संवेदनशील स्थान पर, जहाँ चप्पे-चप्पे पर कैमरे होने का दावा किया जाता है, एक ड्राइवर गाड़ी लेकर मुख्य गेट से बाहर कैसे निकल गया?
-
प्रक्रिया में चूक: क्या चाबी सौंपने और पर्ची (Token) देने की प्रक्रिया सिर्फ कागजी खानापूर्ति है? बिना टोकन के वाहन को परिसर से बाहर जाने की अनुमति कैसे मिली?
-
प्रबंधन की चुप्पी: घटना के घंटों बाद भी मॉल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण न आना, जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है।
-
पर्यटकों की सुरक्षा: रायपुर एक व्यापारिक केंद्र है, जहाँ पड़ोसी राज्यों (जैसे ओडिशा) से लोग आते हैं। ऐसी घटनाएं शहर की छवि और ‘सुरक्षित रायपुर’ के दावे को धूमिल करती हैं।
आंकड़े और हकीकत: पार्किंग या रिस्क जोन?
शहर के मॉल और मल्टीप्लेक्स में सुरक्षा के दावों और हकीकत के बीच एक बड़ी खाई है:
| विवरण | स्थिति |
| औसत दैनिक फुटफाल | 5,000 – 10,000 लोग |
| पार्किंग शुल्क | ₹30 से ₹100 तक (प्रीमियम/वैलेट के लिए अधिक) |
| सुरक्षा की जिम्मेदारी | अक्सर ‘स्वयं के जोखिम पर’ (At owner’s risk) के बोर्ड लगाकर पल्ला झाड़ लिया जाता है |


