KWNS – मिडिल ईस्ट से इस वक्त बेहद गंभीर हालात की खबरें सामने आ रही हैं। अमेरिका और इज़रायल द्वारा कथित संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने पलटवार करते हुए बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। घटनाक्रम ने पूरे पश्चिम एशिया को बड़े टकराव की दहलीज पर ला खड़ा किया है।
खामेनेई के बाद बढ़ा तनाव
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु की खबरों के बाद से ही क्षेत्र में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में संभावित बदलाव ने हालात को और संवेदनशील बना दिया।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और इज़रायल की वायुसेनाओं ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मंगलवार सुबह बहरीन के शेख ईसा क्षेत्र में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला करने का दावा किया है। ईरानी पक्ष के अनुसार इस कार्रवाई में अमेरिकी ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा है, हालांकि स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
लेबनान तक फैली जंग
संघर्ष की आग अब लेबनान तक पहुंच गई है। ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह ने इज़रायल के भीतर हमलों की जिम्मेदारी ली है। इसके जवाब में इज़रायल ने बेरूत के दहियाह इलाके में बड़े पैमाने पर बमबारी की है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हजारों लोग प्रभावित हुए हैं और विस्थापन की स्थिति बन गई है।
वैश्विक असर
इस टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी दिखने लगा है। कच्चे तेल के वैश्विक बेंचमार्क Brent Crude की कीमतों में 5% से 8% तक उछाल दर्ज किया गया है। ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका से बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है।
बढ़ता कूटनीतिक दबाव
अमेरिका ने इसे अपनी सुरक्षा और सहयोगियों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया है, जबकि ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उसकी संप्रभुता पर किसी भी हमले का जवाब “दोगुनी ताकत” से दिया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तनाव कम करने की अपीलें तेज हो गई हैं।
मौजूदा हालात में स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है और क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंका से वैश्विक समुदाय चिंतित है।


