शनिवार की पूजा में शनि देव को प्रसन्न करने के लिए सही विधि, संयम और नियमों का पालन बेहद जरूरी होता है। जानें ऐसा करने से शनि की टेढ़ी दृष्टि से बचाव संभव माना जाता है।
शनि की टेढ़ी दृष्टि से बचने के नियम
हिंदू धर्म में शनिवार का दिन बहुत ही खास माना गया है। इस दिन भक्त भगवान शनि देव की पूजा करते है और उनके लिए उपवास भी रखते हैं ताकि जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाएं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव की दृष्टि काफी महत्वपूर्ण होती है। शनि संतुलन और न्याय का ग्रह है। ऐसे में अक्सर शनि की शक्ति को ना पहचानने वाले लोग शनि देव की टेढ़ी दृष्टि का शिकार हो जाते हैं।
कहा जाता है कि शनि देव की टेढ़ी नजर उन लोगों पर पड़ती है जो बुरे कर्मों से लिपटे रहते हैं, चाहे वो काम जाने-अनजाने ही क्यों ना हुई हो। ऐसे में आइए जानते हैं शनि देव की टेढ़ी दृष्टि से बचने के नियम।
शनिवार के दिन गलती से भी तामसिक भोजन ना करें। खासतौर पर इस दिन मदिरापान और नशीली चीजों से परहेज करें। जीवन में ईमानदार बनें, सत्य बोलें और बड़े बुजुर्गों को सम्मान दें। इसके अलावा शनि देव को प्रसन्न करने के लिए किसी भी तरह का गलत कार्य नहीं करना चाहिए। क्योंकि बुरे कर्मों पर शनि कंगाल बना देंगे।
मान्यता है कि अगर आप शनि देव कृपा की पाना चाहते हैं तो उनकी आराधना शाम के समय करें क्योंकि शाम के वक्त शनि देव की पूजा ज्यादा फलदायी मानी जाती है। शनिवार के दिन शाम को सरसों के तेल का दीपक पीपल के नीचे जलाएं, और 7 बार उसकी परिक्रमा करें।
खासतौर पर इस दिन शनि चालीसा पाठ करें और शनि देव के मूल मंत्र ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का जाप करें। आरती के साथ पूजा का समापन करें। मान्यता है कि 7 शनिवार ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं, साथ ही उनकी टेढ़ी दृष्टि भी कभी नहीं पड़ती है।
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