खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। केंद्रीय कमेटी मेंबर रूपेश उर्फ सतीश उर्फ विकल्प ने अत्मसमर्पण से ठीक पहले स्थानिय मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘हम आत्मसमर्पण नहीं कर रहे हैं, हम हथियार छोड़ रहे हैं, आदिवासियों के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। रूपेश ने बताया कि उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा से हुई चर्चा में हमनें 10 मांगों को उनके सामने रखा है। उन्हाेने बताया कि ‘हमने सरकार के सामने बस्तर में पांचवी और छठी अनुसूची एवं पेशा कानून लागू करने की मांग की है। इसमें मुख्य रूप से इस बात को उन्हें जानकारी दी गई है, कि ग्रामीणों की जमीन जोर जबरदस्ती से नहीं ली जा सकती, यदि कोई जमीन माइनिंग या दूसरी चीजों के लिए चयनित होती है, तो उसके लिए ग्राम सभा की बैठक होगी, ग्रामीणों की राय ली जाएगी। ग्रामीणों की अनुमति और ग्राम सभा के अनुमोदन के बगैर किसी भी ग्रामीण की जमीन नहीं ली जाएगी। प्रशासन और पुलिसिया जोर जबरदस्ती ग्रामीण पर नहीं किया जाएगा।
केंद्रीय कमेटी मेंबर रूपेश ने कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पांचवी और छठी अनुसूची एवं पेशा कानून लागू करने का विश्वास दिलाया है। वन कानून काे सही तरीके से अमल करना है। सरकार ने मूल वासी बचाओ मंच को बंद कर दिया है, इस मंच को फिर से चालू किया जाए, इस मंच के बैनर के नीचे जो भी कार्य किया जा रहे थे ,उसे संवैधानिक तरीके के अनुसार चालू करवाया जाए, मूलवासी बचाओ मंच को सरकार ने जबरन बंद कर दिया था। मूलवासी बचाओ मंच के प्रतिबंध आगे नही बढ़ाने की मांग रखी गई है। हम चाहते हैं कि माओवादी कैडर जो जेल में बंद है उनकी रिहाई हो जेल में बंद साथियाें काे रिहा करने की मांग पर विचार करने का आश्वासन उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दिया है। रूपेश ने कहा कि हमारी मांगाें पर स्पष्ट आश्वासन नही मिला है।
नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के मेंबर रूपेश ने बताया कि जून महीने में ही बसवराजू ने हथियार छोड़ने की बात कही थी. बसवराजू ने सभी कमेटी के मेंबरों को इस बात के लिए कहा था। हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो जाना चाहिए। रूपेश ने कहा कि इस बाबत केंद्रीय कमेटी मेंबर के साथ ही दूसरे नेताओं से भी बात हुई लेकिन वह लोग हथियार छोड़ने को तैयार नहीं थे। बसवराजू ने उन लोगों को कहा था, कि इससे संगठन को बड़ा नुकसान होगा, इसलिए आत्मसमर्पण का निर्णय लेना चाहिए और हथियार छोड़ने की बात पर एक मत होना चाहिए। रूपेश ने कहा किसंगठन में कोई इस पर तैयार नहीं हुआ यदि बसवराजू की बात को मान लिया गया होता तो संगठन को इतना ज्यादा नुकसान नहीं होता। रूपेश ने बताया कि दक्षिण सबजाेनल कमेटी के देवा और हिड़मा से भी बसवराजू ने सरेंडर की बात कही थी लेकिन उनकी बात को मना कर दिया गया।
नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के मेंबर रूपेश ने कहा कि नक्सलियों के जितने भी तंत्र माड़ डिवीजन में थे सब बंद हो गए हैं। नक्सलियों द्वारा जितने विभाग चलाए जाते थे, सभी विभाग बंद हो गए हैं, क्योंकि इन विभागों को चलाने के लिए अब लोग नहीं बचे। नक्सलियों के पास इन विभागों को चलाने के लिए जो संसाधन चाहिए वह भी नहीं बचा। हमने संगठन के विस्तार के लिए एक तंत्र विकसित किया था, जो अलग-अलग काम करते थे, लेकिन अब न तो तंत्र बचा है और ना ही उसे चलाने के लिए कोई विभाग बचा। उन्हाेने बताया कि वर्तमान समय में माओवादी कैडर में कोई भी महासचिव नहीं है। पहले इस बात की जानकारी सामने आई थी, कि देवजी को महासचिव बनाने की जिम्मेदारी मिली थी जिसे नकार दिया गया है। रूपेश ने कहा कि यह सिर्फ उड़ाई गई खबर है। वर्तमान समय में केंद्रीय कमेटी में कोई महासचिव नहीं है। केंद्रीय कमेटी में महासचिव का चयन केंद्रीय कमेटी के सभी सदस्यों के साथ बैठक करके होती है। वर्तमान समय में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है उसमें कोई बैठक हुई ही नहीं हुई है। ऐसे में यह निर्णय हुआ ही नहीं है कि महासचिव कौन होगा इसलिए जो बातें सामने आई थी, उसका कोई मतलब नहीं है।
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