खबर वर्ल्ड न्यूज-दांतेवाड़ा। (विशेष संवाददाता): छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा जिले में सरकारी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार ने एक नया रूप धारण कर लिया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर निखिल कमर पर ठेकेदारों और दैनिक मजदूरों से अवैध रूप से करोड़ों रुपये की वसूली करने का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय ठेकेदारों और कामगारों की शिकायतों के आधार पर यह मामला सामने आया है, जिसमें परियोजनाओं की मंजूरी और भुगतान के बदले कमीशन की मांग की जा रही है। जिले में चल रही सड़क निर्माण, पुल और भवन परियोजनाओं में यह कथित घोटाला विकास कार्यों को प्रभावित कर रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।
आरोपों का विस्तार: आंकड़ों के साथ सच्चाई
शिकायतकर्ता ठेकेदारों के अनुसार, निखिल कमर पिछले दो वर्षों (2023-2025) से जिले की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल रहे हैं। दांतेवाड़ा जिले में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए PWD के तहत कुल 12 परियोजनाएं स्वीकृत हुईं, जिनकी अनुमानित लागत 150 करोड़ रुपये है। इनमें से 8 परियोजनाओं (कुल मूल्य 95 करोड़ रुपये) पर काम शुरू हो चुका है, लेकिन शिकायतों के मुताबिक, इनमें से 70% ठेकेदारों को भुगतान में देरी का सामना करना पड़ा। ठेकेदारों का दावा है कि निखिल कमर ने प्रत्येक परियोजना के लिए 5-8% कमीशन की मांग की, जो औसतन 4.75 से 7.6 करोड़ रुपये के बीच की अवैध वसूली का आंकड़ा बनाता है।
एक अनाम ठेकेदार ने बताया, “एक 20 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना के लिए हमें 1.2 करोड़ रुपये का कमीशन देना पड़ा। इसमें से 80 लाख रुपये नकद और बाकी बैंक ट्रांसफर के माध्यम से। यदि भुगतान न किया जाता, तो फाइलें वर्षों लंबित रहतीं।” इसी तरह, दैनिक मजदूरों (कुल 1,200 कामगार जिले की परियोजनाओं पर कार्यरत) से प्रति माह 500-1,000 रुपये की वसूली का आरोप है, जो सालाना लगभग 72 लाख रुपये (1,200 मजदूर × 600 रुपये औसत × 12 माह) की अनुमानित रकम बनता है। ये आंकड़े शिकायतकर्ताओं द्वारा जुटाए गए रिकॉर्ड और गवाह बयानों पर आधारित हैं, जो उच्च अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं।
| परियोजना का प्रकार | कुल परियोजनाएं | अनुमानित लागत (करोड़ रुपये) | कथित कमीशन दर (%) | अनुमानित वसूली (करोड़ रुपये) |
|---|---|---|---|---|
| सड़क निर्माण | 5 | 75 | 5-8 | 3.75-6 |
| पुल निर्माण | 2 | 15 | 6-8 | 0.9-1.2 |
| भवन/अन्य | 5 | 60 | 5-7 | 3-4.2 |
| कुल | 12 | 150 | औसत 5.8 | 7.65-11.4 |
(नोट: आंकड़े शिकायतकर्ताओं के बयानों और विभागीय रिकॉर्ड पर आधारित; आधिकारिक जांच में सत्यापन होगा।)
प्रभाव: स्थानीय जनता में आक्रोश और विकास पर ब्रेक
इस कथित भ्रष्टाचार से दांतेवाड़ा के ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य ठप हो गए हैं। जिले में 65% आबादी आदिवासी है, और ये परियोजनाएं ग्रामीण सड़कों और पुलों के माध्यम से रोजगार प्रदान करती हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, 300 से अधिक ठेकेदार प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 40% ने काम छोड़ दिया है। एक सर्वे (स्थानीय NGO द्वारा) में पाया गया कि 85% प्रभावित ठेकेदारों ने बताया कि देरी से उनके व्यवसाय में 30-50% नुकसान हुआ। मजदूरों का कहना है, “हमारी मजदूरी 200-300 रुपये प्रतिदिन है, लेकिन वसूली के बाद कुछ बचता ही नहीं।”
स्थानीय विधायक ने कहा, “यह मामला जिले की छवि को धूमिल कर रहा है। हमने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, और तत्काल जांच की मांग की है।” जनता में गुस्सा इतना है कि पिछले सप्ताह 200 से अधिक लोगों ने कलेक्ट्रेट पर धरना दिया, जिसमें “भ्रष्टाचार मुक्त दांतेवाड़ा” के नारे लगाए गए।
जांच और कार्रवाई: अधिकारी अलर्ट, लेकिन देरी पर सवाल
जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। कलेक्टर ने बताया, “शिकायतें प्राप्त हुई हैं, और एक तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपी जाएगी। यदि आरोप सिद्ध हुए, तो सख्त कार्रवाई होगी, जिसमें निलंबन और आपराधिक मुकदमा शामिल है।” राज्य स्तर पर छत्तीसगढ़ लोकायुक्त को भी सूचित किया गया है। हालांकि, शिकायतकर्ता देरी पर नाराज हैं, क्योंकि निखिल कमर पिछले छह माह से पद पर हैं और पहले भी समान शिकायतें दर्ज हुई थीं।
विपक्षी दलों ने इसे “सिस्टमिक भ्रष्टाचार” करार देते हुए विधानसभा में चर्चा की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सिद्ध होता है, तो यह छत्तीसगढ़ के PWD विभाग में बड़े पैमाने पर ऑडिट की मांग को जन्म देगा।
यह मामला न केवल दांतेवाड़ा, बल्कि पूरे राज्य में सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है। उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच से पीड़ितों को न्याय मिलेगा और भविष्य में ऐसे कृत्यों पर अंकुश लगेगा।


