नवरात्रि के दूसरे दिन आज 23 सितंबर को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। ये मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप और तप व साधना की देवी हैं। आज पूजा के दौरान इस कथा का पाठ जरूर करें।
मां ब्रह्मचारिणी कथा
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत 22 सितंबर से हो चुकी है। नौ दिवसीय नवरात्रि का आज 23 सितंबर को दूसरा दिन है, जोकि मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है।
मां बह्मचारिणी को तपस्या और साधना की देवी कहा जाता है। इनकी पूजा करने से कुंडली में मंगल दोष भी दूर होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। लेकिन पूजा के दौरान इस कथा का पाठ जरूर करें। यहां पढ़ें मां ब्रह्मचारिणी की कथा।
धार्मिक कथा के अनुसार, देवी ब्रह्मचारिणी का जन्म राजा हिमालय और रानी मेना की पुत्री पार्वती के रूप में हुआ था। उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।
हजार वर्ष तक उन्होंने केवल फल और फूल खाकर बिताएं। फिर हजार वर्षों तक केवल जड़ी-बूटियों पर जीवित रहीं और फिर हजार वर्षों तक टूटे हुए बेलपत्र पर खाए। इसके बाद उन्होंने अन्न और जल का भी त्याग कर दिया।
ब्रह्मचारिणी देवी की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं और सप्तऋषियों ने उन्हें आशीर्वाद दिया और “अपर्णा” नाम दिया और मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद भी दिया।
मां ब्रह्मचारिणी की इस कथा का यह सार है कि, इसी तरह हमारा जीवन भी कठिनाईयों से भरा होता है, लेकिन मन को विचलित नहीं होने देना चाहिए।
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