सुरक्षा के लिए 1,000+ पुलिसकर्मी तैनात
खबर वर्ल्ड न्यूज-डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में स्थित माँ बम्लेश्वरी शक्तिपीठ आज से शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत के साथ जीवंत हो उठा है। लगभग 1,600 फीट ऊँची पहाड़ी की चोटी पर विराजमान माँ के दरबार को फूलों, रंगोली, दीपमालाओं और पारंपरिक सजावट से सजाया गया है। सुबह होते ही देश-प्रदेश के कोने-कोने से पहुँचे श्रद्धालुओं का ताँता लग गया, और ‘जय माता दी’ व ‘माँ बम्लेश्वरी की जय’ के उद्घोष से पूरा डोंगरगढ़ गूँज उठा। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, पहले ही दिन 50,000 से अधिक भक्तों ने दर्शन किए, जबकि पूरे नौ दिनों में 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। यह अनुमान पिछले वर्षों के आँकड़ों पर आधारित है, जब चैत्र और शारदीय नवरात्रि में क्रमशः 8 लाख और 12 लाख भक्तों ने दर्शन किए थे।
इस वर्ष नवरात्रि का पर्व 22 सितंबर से 1 अक्टूबर 2025 तक चलेगा, जिसके ठीक बाद 2 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, एकम (22 सितंबर) को घटस्थापना, अष्टमी (29 सितंबर) को हवन-यज्ञ और नवमी (30 सितंबर) को विसर्जन की परंपरा निभाई जाएगी। नवरात्रि भर मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा, जिसमें माँ के नौ स्वरूपों—शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक—की विशेष आराधना होगी। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, इस बार तृतीया तिथि दो दिनों (24-25 सितंबर) तक रहेगी, जिससे माँ चंद्रघंटा की पूजा विशेष महत्वपूर्ण होगी।
सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम: भीड़ प्रबंधन पर जोर
भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और रेलवे ने विशेष तैयारियाँ की हैं। कलेक्टर डॉ. सर्वेश भुरे ने हाल ही में आयोजित बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोपरि हो। प्रमुख आँकड़ों के साथ व्यवस्थाओं का विवरण निम्नलिखित तालिका में है:
| व्यवस्था का प्रकार | विवरण और आँकड़े |
|---|---|
| सुरक्षा बल | 1,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात, जिसमें 500 स्थानीय और 500 अतिरिक्त बल शामिल। जिगजैग बैरिकेडिंग से भगदड़ रोकने की योजना। |
| रेल सुविधाएँ | 4 विशेष ट्रेनें—गोंदिया-दुर्ग-गोंदिया MEMU का रायपुर विस्तार, रायपुर-डोंगरगढ़ MEMU का गोंदिया विस्तार। बिलासपुर-भगत की कोठी और बिलासपुर-बीकानेर ट्रेनों का डोंगरगढ़ पर अस्थायी ठहराव (22 सितंबर से 1 अक्टूबर)। अनुमानित 2 लाख रेल यात्री। |
| परिवहन और पहुँच | 1,100 सीढ़ियों वाली पैदल मार्ग के अलावा रोपवे सुविधा 24 घंटे चालू। रोपवे से प्रतिदिन 5,000 श्रद्धालु ऊपर पहुँच सकेंगे। बस स्टैंड से मंदिर तक 20 अतिरिक्त शटल बसें। |
| स्वास्थ्य और अन्य सुविधाएँ | 10 मोबाइल मेडिकल यूनिट, 50 अस्थायी शौचालय, 20 पार्किंग जोन (कुल 5,000 वाहन क्षमता)। सीसीटीवी कवरेज 100%। जल आपूर्ति के लिए 50 टैंकर और 100 पीने के पानी स्टेशन। |
| भीड़ अनुमान | दैनिक औसत 1 लाख, चरम पर (अष्टमी-नवमी) 2.5 लाख। क्षमता 1 लाख वाली जगह पर भीड़ नियंत्रण के लिए ड्रोन निगरानी। |
पिछले वर्ष (2024) में अष्टमी पर 2.5 लाख श्रद्धालुओं के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बनी थी, जिसमें एक महिला की मृत्यु हो गई थी। इस बार प्रशासन ने सबक लेते हुए जिगजैग रूट और अतिरिक्त बैरिकेडिंग की व्यवस्था की है। एसएसपी विजय अग्रवाल ने कहा, “भीड़ प्रबंधन के लिए डिजिटल टोकन सिस्टम शुरू किया गया है, ताकि दर्शन सुगम हों।”
माँ बम्लेश्वरी मंदिर का प्राचीन इतिहास: 2,200 वर्ष पुरानी आस्था की धरोहर
डोंगरगढ़ का बम्लेश्वरी मंदिर न केवल धार्मिक केंद्र है, बल्कि 2,200 वर्ष पुरानी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी। पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार, यह प्राचीन कामाख्या नगरी (कामावतीपुर) का हिस्सा था, जो उज्जैन से जुड़ा हुआ था। लोककथाओं में राजा वीरसेन की निःसंतान कथा प्रमुख है—पुत्र प्राप्ति के लिए शिव-पार्वती की आराधना करने पर रानी को पुत्र रत्न मिला, जिसके बाद राजा ने यहाँ मंदिर बनवाया। एक अन्य कथा राजा विक्रमादित्य से जुड़ी है, जिन्होंने आत्महत्या करने से ठीक पहले माँ के दर्शन पाए और जीवनदान प्राप्त किया।
महाभारत काल से जोड़ते हुए कुछ परंपराएँ पांडवों और विक्रमादित्य के संबंधों का उल्लेख करती हैं, हालाँकि पुरातात्विक प्रमाण सीमित हैं। मंदिर 1,600 फीट ऊँचाई पर है, और पहाड़ी के नीचे छोटी बम्लेश्वरी (मुख्य मंदिर से 0.5 किमी दूर) भी आस्था का केंद्र है। माँ बगलामुखी का स्वरूप होने से यह शत्रु नाश और विजय की प्रतीक मानी जाती हैं। 1964 में खैरागढ़ रियासत के राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह ने ट्रस्ट गठित कर मंदिर प्रबंधन सौंपा। केंद्र सरकार ने 2023 में प्रसाद योजना के तहत 46 करोड़ रुपये स्वीकृत किए, जिससे मंदिर का सौंदर्यीकरण पूरा हो चुका है।
नवरात्रि में तीसरे दिन (24 सितंबर) माँ चंद्रघंटा की आराधना विशेष होगी, जो शांतिदायक और कल्याणकारी मानी जाती है। विदेशी भक्त भी ज्योति कलश स्थापित करते हैं—पिछले वर्ष 5,000 से अधिक कलश प्रज्वलित हुए।
आध्यात्मिक और आर्थिक आयाम: न केवल पूजा, बल्कि उत्सव का महाकुंभ
नवरात्रि केवल नौ दिवसीय उत्सव नहीं, बल्कि अज्ञान पर ज्ञान, अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। भक्त उपवास, कीर्तन, रात्रि जागरण और कन्या पूजन (अष्टमी/नवमी) से आत्मिक शुद्धि करते हैं। इस वर्ष भी डोंगरगढ़ का मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगा—अनुमानित 500 करोड़ रुपये का कारोबार, जिसमें हस्तशिल्प, प्रसाद और पर्यटन शामिल। 100 से अधिक स्टॉल सजे हैं, जहाँ पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन, चूड़ियाँ और पूजा सामग्री बिक्री हो रही है।
पर्यटन विभाग के अनुसार, नवरात्रि में 70% पर्यटक धार्मिक दर्शन के साथ स्थानीय झीलों और हरी-भरी घाटियों का आनंद लेंगे। रोपवे ने वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के लिए यात्रा आसान बना दी है—प्रति टिकट 50 रुपये।
डोंगरगढ़ न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी। इस नवरात्रि में माँ बम्लेश्वरी सभी भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करें। जय माता दी!


