नई दिल्ली। पहले के जमाने में जब कहीं से शंख बजने की आवाज आती थी, तो लोग समझ जाते थे कि हो न हो कभी पूजा पाठ अनुष्ठान या यज्ञ हो रहा है। भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में अनेक रोगों के आसान और गुणकारी इलाज बताए गए हैं। बात अगर सांस के मरीजों की करे तो इससे जुड़ी बीमारियों जैसे अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस और एलर्जी के इलाज के लिए एक पारंपरिक उपाय शंख बजाना रामबाण साबित हो सकता है। वैसे शंख बजाने के बहुत धार्मिक महत्व बताए हैं, यही नहीं बल्कि शंख बजाने से कई रोगों से निजात मिल सकती है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया के फेमस योग चिकित्सक डॉ. सर्वेश कुमार के अनुसार, शंख बजाना एक तरह का श्वसन व्यायाम है, जो प्राणायाम की तरह असर करता है। इसके नियमित अभ्यास से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है। शंख बजाने से श्वास क्रिया में सुधार जाता है। इससे शरीर में अधिक ऑक्सीजन पहुंचता है, जिसके कारण सांस लेने में आसानी होती है।
शंख बजाने से होते हैं जबरदस्त फायदे
जब शंख बजाई जाती है, तो लोग इसे शुभ मानते हुए ईश्वर का ध्यान करते हैं, जिससे निकली ध्वनि तरंगें मानसिक तनाव को कम करने में मदद करती हैं, साथ ही यह वायुमार्ग को साफ करती है। डॉ. सर्वेश कुमार ने कहा कि, यदि किसी व्यक्ति को सांस फूलने या बार-बार खांसी-जुकाम की बीमारी हो, तो वह शंख बजाने का नियमित अभ्यास कर इन समस्याओं से राहत पा सकता है। इसके अलावा, शंख बजाने से श्वास संबंधी रोग (जैसे अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस), थायरॉयड की समस्या, स्वरयंत्र से जुड़ी समस्याएं, तनाव, मानसिक रोग, गले के रोग, फेफड़ों के रोग, हृदय रोग, रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी और स्मरण शक्ति की कमी जैसी तमाम बीमारियों से छुटकारा मिलती हैं।
कैसे शंख बजाना है लाभकारी…
शंख सुबह के समय बजाना बेहद लाभकारी और गुणकारी माना जाता ह। अभ्यास शुरू करने से पहले शंख को साफ पानी से जरूर धोना चाहिए। शंख को होंठों से सटाकर गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे फूंक मारें और शंख को बजाएं। शुरू के दिनों में 2-3 मिनट का ही अभ्यास करें, धीरे-धीरे समय को 5 से 10 मिनट तक बढ़ा सकते हैं। शंख बजाने के दौरान सांस पर कंट्रोल पाना ही कारीगरी होती हैं। ध्यान रहे किन्हीं परिस्थितियों में शंख बजाना हानिकारक भी हो सकता है, इसलिए एक बार आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श जरूर ले लें।
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