इस समय हम साल 2025 के जुलाई माह में हैं, जो वर्ष का 7 महीना होता है। जुलाई से कई मांगलिक कार्यों और त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जैसे सावन, हरियाली तीज, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी से लेकर दीपावली और छठ पूजा तक, जिनका इंतजार लोग पूरे वर्ष भर करते हैं।
इस साल ये सभी त्योहार बेहद जल्दी आ रहे हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि खास बात यह है कि इस साल सावन मास से लेकर रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी से लेकर नवरात्रि, दशहरा, दीपावली पिछले दो सालों की तुलना में 11 दिन तक जल्दी आएंगे।
अगस्त महीने से त्योहारों का सिलसिला शुरू
9 अगस्त को रक्षाबंधन, 22 सितंबर से नवरात्रि, 2 अक्टूबर को दशहरा और 20 अक्टूबर को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। देवों के देव महादेव की आराधना और भक्ति का महीना सावन 11 जुलाई से शुरू हो गया है। सावन इस बार 30 दिनों का होगा, इसमें चार सावन सोमवार आएंगे। 4 मंगला गौरी के व्रत के अलावा, 2 प्रदोष, चतुर्दशी, हरियाली अमावस्या, हरियाली तीज, नागपंचमी, पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर्व शामिल हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि देवशयनी एकादशी के बाद अब चार महीने तक लगातार तीज-त्योहार आएंगे। सावन के बाद जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी से लेकर नवरात्रि, दशहरा-दीपावली पिछले दो सालों की तुलना में 11 दिन जल्दी आएंगे।
ये त्योहार पूरे परिवार में उल्लास, एकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं। सावन मास के सोमवार शिव भक्ति में डुबो देते हैं, तो वहीं हरियाली तीज महिलाओं के लिए सौभाग्य, प्रेम और उत्सव का प्रतीक बनकर आती है। रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत करता है, जबकि दीपावली में पूरा देश जगमगा उठता है। पिछले साल के मुकाबले यह सभी पर्व इस बार आपको जल्दी मनाने को मिलेंगे।
2026 में ज्येष्ठ अधिक मास
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि कैलेंडर सौरमास/सौर महीना पर आधारित यानी 365 दिनों का होता है, जबकि हमारे पंचांगों की गणना चंद्रमास पर आधारित होती है और यह 354 दिनों का होता है। ऐसे में प्रतिवर्ष पड़ने वाले इन 11 दिनों के भेद को पूरा करने के लिए हर 3 साल में अधिक मास आता है। इससे पहले सावन अधिक मास वर्ष 2023 में पड़ा था और अब अगले साल यानी 2026 में फिर से ज्येष्ठ अधिक मास लगेगा, जिसका समय 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक रहेगा।
भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक डॉ। अनीष व्यास ने बताया कि सावन 11 जुलाई से शुरू हो गया है। जबकि 9 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ सावन का समापन होगा। वहीं 22 सितंबर से नवरात्रि, 2 अक्टूबर को दशहरा, 20 अक्टूबर को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा।
निर्धारित तिथि पर ही आते हैं त्योहार
कैलेंडर सौरमास पर आधारित होता है, यानी 365 दिनों का होता है, जबकि हमारे पंचांगों की गणना चंद्रमास पर आधारित है। यह 354 दिनों का होता है। ऐसे में हर साल आने वाले 11 दिनों के अंतर को पूरा करने के लिए तीन साल में अधिक मास आता है। 2023 में सावन अधिक मास में आया था, अब अगले साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास में आएगा।
भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि त्योहारों की गणना हिंदी पंचांग के हिसाब से की जाती है। जिसके लिए हिंदी का माह और तिथि निर्धारित है। हिंदी पंचांग के अनुसार इस तिथि पर यह त्योहार आते हैं लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार आगे-पीछे इसलिए हो जाते हैं कि हिंदी कैलेंडर में हर तीसरे साल अधिक मास होता है। ऐसे में एक माह की अवधि बढ़ जाती है,इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर की गणना के हिसाब से त्योहार आगे-पीछे होते हैं और उनका क्रम बदलता है।
सावन में त्योहार
भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि 14, 21 व 28 जुलाई और 4 अगस्त को सावन के सोमवार हैं, जबकि 15 जुलाई, 22 जुलाई, 29 जुलाई और 5 अगस्त को मंगला गौरी का व्रत होगा। इसी तरह 22 जुलाई को प्रदोष, 23 जुलाई को चतुर्दशी, 24 जुलाई हरियाली अमावस्या, 27 जुलाई हरियाली तीज, 29 जुलाई नागपंचमी, 6 अगस्त प्रदोष, 8 अगस्त व्रत की पूर्णिमा और 9 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व है।
2025 में त्योहार
भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषण डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि सावन की शुरुआत 11 जुलाई, रक्षाबंधन 9 अगस्त, जन्माष्टमी 16 अगस्त, गणेश चतुर्थी 27 अगस्त, शारदीय नवरात्रि शुरुआत 22 सितंबर, दशहरा 2 अक्टूबर, दीपावली 20 अक्टूबर, देवउठनी एकादशी 1 नवंबर रहेगे।
2024 में त्योहार
भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि 22 जुलाई से सावन माह, 19 अगस्त रक्षाबंधन, 26 अगस्त कृष्ण जन्माष्टमी, 7 सितंबर गणेश चतुर्थी, 3 अक्टूबर शारदीय नवरात्रि, 12 अक्टूबर विजयादशमी, 29 अक्टूबर धनतेरस, 31 अक्टूबर दीपावली, 12 नवंबर देवउठनी एकादशी थी।
2023 में त्योहार
भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि 30 अगस्त रक्षाबंधन, 7 सितंबर कृष्ण जन्माष्टमी, 19 सितंबर गणेश चतुर्थी, 15 अक्टूबर शारदीय नवरात्रि, 24 अक्टूबर विजयादशमी, , 10 नवंबर धनतेरस, 12 नवंबर दीपावली, 23 नवंबर देवउठनी एकादशी थी।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि K.W.N.S. किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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