खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में मुख्य आरोपी और रायपुर के पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले की गंभीरता और ईडी द्वारा पेश किए गए सबूतों को पर्याप्त माना।
* क्या है शराब घोटाला?
इस घोटाले की शुरुआत 2019 में उस वक्त मानी जाती है, जब राज्य सरकार ने आबकारी नीति में संशोधन करते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के ज़रिए शराब बेचने की व्यवस्था लागू की। इस प्रणाली को पारदर्शिता लाने की दिशा में कदम बताया गया था, लेकिन ईडी की जांच में यह सामने आया कि इस नीति का दुरुपयोग कर एक संगठित आपराधिक नेटवर्क ने 2161 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार किया।
* मुख्य बिंदु (ED की चार्जशीट के अनुसार):
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अनवर ढेबर को इस घोटाले का मास्टरमाइंड बताया गया है, जिसने कारोबारी, अफसर और राजनैतिक लोगों का सिंडिकेट बनाकर शराब की खरीदी-बिक्री में भारी गड़बड़ियां कीं।
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अरुणपति त्रिपाठी, जो CSMCL के MD बनाए गए थे, उनके जरिए पूरे नेटवर्क का प्रबंधन होता था।
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यह सिंडिकेट शराब ठेकों, सप्लाई, ब्रांड अप्रूवल और कोटा वितरण में मोटी रिश्वत वसूलता था।
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88 करोड़ की अवैध कमाई सिर्फ आबकारी विभाग के 22 अधिकारियों ने की, जिन्हें हाल ही में निलंबित किया गया।
* मुख्य आरोपियों और संस्थाओं की सूची:
| क्रमांक | नाम/संस्थान | भूमिका / आरोप |
|---|---|---|
| 1 | अनवर ढेबर | मुख्य सरगना, अवैध वसूली में संलिप्त |
| 2 | अरुणपति त्रिपाठी | CSMCL के पूर्व MD, तैनाती में संदेह |
| 3 | कवासी लखमा | पूर्व आबकारी मंत्री, ED द्वारा गिरफ्तार |
| 4 | अनिल टुटेजा (पूर्व IAS) | नीति निर्धारण में भूमिका, बेटे यश सहित आरोपी |
| 5 | सौम्या चौरसिया | पूर्व उप सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय |
| 6 | त्रिलोक सिंह ढिल्लन | व्यवसायी, डिस्टलर नेटवर्क में शामिल |
| 7 | दिशिता वेंचर, टॉप सिक्योरिटी, वेलकम डिस्टलर, ओम सांई ब्रेवरेज, नेस्ट जेन पावर, भाटिया वाइन मर्चेंट आदि | फर्जी बिलिंग, सप्लाई और घोटाले में भागीदारी |
* ईडी की चार्जशीट और अदालती कार्यवाही:
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13 मार्च 2025 को 3,841 पन्नों की चार्जशीट पेश की गई।
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कुल 22 प्रमुख आरोपी, जिनमें से अधिकांश अभी जेल में हैं या न्यायिक हिरासत में हैं।
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ED ने दावा किया है कि यह पूरा नेटवर्क 2019 से 2022 तक सक्रिय था और हर महीने करोड़ों की अवैध वसूली होती थी।
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जांच में नकद लेनदेन, फर्जी चालान, बोगस फर्मों के जरिए पैसा खपाने और हवाला के जरिये ट्रांजैक्शन की पुष्टि हुई है।
* राजनीतिक और प्रशासनिक साया
इस पूरे घोटाले को लेकर कई वरिष्ठ अधिकारियों और तत्कालीन सरकार पर उंगलियां उठी हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि सत्ता में बैठे लोगों की जानकारी और संरक्षण में ही यह भ्रष्टाचार हुआ।
भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले में राज्य राजस्व को भारी नुकसान हुआ है। वहीं, आम नागरिकों को भी महंगी और निम्न गुणवत्ता वाली शराब का सामना करना पड़ा।
* अब आगे क्या?
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सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद अनवर ढेबर की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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ED द्वारा नया पूरक चालान भी जल्द दाखिल किए जाने की संभावना है।
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मामले में सीबीआई जांच की मांग भी तेज होती जा रही है।


