नई दिल्ली। गर्मी का मौसम चल रहा है। इस मौसम में थोड़ी-थोड़ी देर बाद प्यास लगती है। कई बार प्यास लगने पर पानी नहीं मिलता जो शरीर के लिए खतरनाक है। आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में जानना जरूरी है। पानी का हमारे जीवन में सबसे अहम रोल है। जीवित रहने के लिए व्यक्ति को पानी चाहिए। पानी के साथ-साथ भोजन की जरूरत भी पड़ती है। लेकिन क्या आपको पता है कि बिना प्यास लगे पानी पीना और बिना भूख लगे खाना खाना बीमारियों को न्योता देता है। प्यास लगने पर पानी न पीना और भूख लगने पर खाना न खाना भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। यह हम नहीं बल्कि आयुर्वेद कहता है। आयुर्वेद में पानी को “अमृत” माना जाता है। इसे सही तरीके से पीने से स्वास्थ्य को लाभ होता है। जबरदस्ती पानी पीने या बहुत अधिक पानी पीने से बचना चाहिए क्योंकि इससे शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है।
ऐसा मेकैनिज्म
आयुर्वेद में भूख को “जठराग्नि” के रूप में जाना जाता है, जो पाचन की अग्नि है। जब जठराग्नि प्रज्वलित होती है, तो इसका मतलब है कि शरीर को भोजन की आवश्यकता है। यदि आप भूख लगने पर नहीं खाते हैं, तो यह जठराग्नि को कमजोर कर सकता है और पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। सहारनपुर के आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बीएएमएस, एमडी डॉ। हर्ष लोकल 18 से कहते हैं कि परमात्मा ने हमारे शरीर में एक ऐसा मेकैनिज्म बनाया है, जिसको हम प्यास कहते हैं। प्यास का मतलब है कि हमें पानी की आवश्यकता है। ऐसा ही एक मेकैनिज्म है भूख। बिना भूख के भोजन करना, बिना प्यास के पानी पीना दोनों ही शरीर के लिए बहुत हानिकारक है। उसी तरीके से प्यास लगने पर पानी न पीना और भूख लगने पर खाना नहीं खाना भी शरीर के लिए हानिकारक है। इससे कई प्रकार के रोग पैदा हो सकते हैं।
ऐसा करना ठीक नहीं
डॉ. हर्ष के अनुसार, अगर आपको प्यास नहीं लगी है फिर भी पानी का सेवन कर रहे हैं तो आपका डाइजेशन सिस्टम कमजोर हो सकता है। भोजन के पाचन करने की क्षमता कम हो सकती है। दस्त लग सकते हैं। ग्रहणी रोग हो सकता है। एनीमिया हो सकता है। लिवर डिसऑर्डर हो सकता है। बिना प्यास के पानी पीना और बिना भूख के भोजन करना आयुर्वेद के हिसाब से ठीक नहीं है।
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