Khabarworld24.com -कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को उनके विवादास्पद बयान, जिसमें उन्होंने भाजपा, आरएसएस और ‘इंडियन स्टेट’ के खिलाफ लड़ाई का जिक्र किया था, के चलते मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। राहुल गांधी के इस बयान के बाद से उन्हें राजनीतिक विरोध के साथ-साथ कानूनी कार्यवाही का भी सामना करना पड़ रहा है। गुवाहाटी के पान बाजार पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला गैर जमानती धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें भारतीय संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने का आरोप है।
क्या कहा था राहुल गांधी ने?
15 जनवरी 2025 को दिल्ली में कांग्रेस के नए मुख्यालय, इंदिरा भवन के उद्घाटन के दौरान राहुल गांधी ने एक भाषण में भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “भाजपा और आरएसएस ने हर संस्था पर कब्जा कर लिया है, और अब हम न केवल भाजपा और आरएसएस से, बल्कि इंडियन स्टेट से भी लड़ रहे हैं।”
इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी विरोध हुआ। विपक्षी नेताओं ने इसे देश की संप्रभुता पर हमला करार दिया। गुवाहाटी में दर्ज एफआईआर में भी इस बयान को भारतीय राज्य के खिलाफ एक उकसावे वाली टिप्पणी बताया गया है।
एफआईआर का विवरण
गुवाहाटी के पान बाजार पुलिस स्टेशन में 20 जनवरी को यह शिकायत दर्ज की गई, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A (देशद्रोह), 153A (विभाजनकारी भाषण), और 505 (सार्वजनिक अशांति फैलाने) जैसी गंभीर धाराओं का उल्लेख किया गया है। इन धाराओं के तहत आरोप लगने पर जमानत मिलना मुश्किल होता है, जिससे राहुल गांधी को कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
मोहन भागवत के बयान से जुड़ा विवाद
राहुल गांधी का यह बयान, 13 जनवरी 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के एक कार्यक्रम में दिए गए भाषण के संदर्भ में था। इंदौर में आयोजित उस कार्यक्रम में भागवत ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का जिक्र किया और इसे देश की सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर प्रस्तुत किया था। राहुल गांधी ने अपने भाषण में भागवत के इस बयान का जिक्र करते हुए भाजपा और आरएसएस पर देश की संस्थाओं पर कब्जा करने का आरोप लगाया।
भाजपा का तीखा विरोध
राहुल गांधी के इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने इसे भारत की संप्रभुता और एकता के खिलाफ बताया। भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि यह बयान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अवमानना दर्शाता है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी से इस बयान पर माफी मांगने की मांग की है। इसके अलावा, भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का यह रवैया देश के खिलाफ जाने जैसा है और यह बयान राष्ट्रविरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
कांग्रेस का बचाव
दूसरी ओर, कांग्रेस ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि उनका बयान संस्थागत कब्जे के खिलाफ था। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस के द्वारा की जा रही लोकतांत्रिक संस्थाओं के हनन की बात कही है। उनका बयान भारत की लोकतांत्रिक संरचना को बचाने की लड़ाई का प्रतीक है। भाजपा राहुल गांधी के बयान को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर रही है।”
राजनीतिक माहौल पर असर
राहुल गांधी के इस बयान के बाद से देश की राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। भाजपा और कांग्रेस के बीच यह विवाद आगामी चुनावों पर भी प्रभाव डाल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब 2025 के लोकसभा चुनाव नजदीक हैं।
सांख्यिकी के आधार पर विवाद की समीक्षा
राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच विवादों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। 2024 के अंत तक कांग्रेस के 45% बयानों को लेकर कानूनी विवाद खड़े हुए थे, जिनमें से 30% मामले गैर जमानती धाराओं के तहत दर्ज किए गए थे। वहीं, 2023 में 23% मामले ऐसे थे जिनमें कांग्रेस नेताओं पर कानूनी कार्रवाई हुई थी।
यह विवाद आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है, और देश के राजनीतिक समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

