Khabarworld24.com -चीन की जनसंख्या में लगातार तीसरे साल गिरावट आई है, जो एक गंभीर संकेत है कि देश को अपने आर्थिक भविष्य के बारे में नई रणनीतियाँ अपनानी पड़ सकती हैं। 2024 के अंत तक चीन की आबादी लगभग 1.40 अरब रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 14 लाख कम है। यह गिरावट चीन सरकार के लिए एक नई चुनौती बन गई है, क्योंकि इसके प्रभाव से न केवल श्रमिक बाजार पर असर पड़ेगा, बल्कि आर्थिक विकास भी प्रभावित हो सकता है।
जनसंख्या गिरावट के कारण
चीन की आबादी में गिरावट के मुख्य कारणों में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और कामकाजी उम्र के लोगों की कमी प्रमुख हैं। चीन की आबादी का पांचवां हिस्सा अब 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र का है, जो कुल जनसंख्या का करीब 22 प्रतिशत है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 31 करोड़ लोग 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं। यह संख्या वर्ष 2035 तक बढ़कर 30 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, जिससे देश के सामाजिक और आर्थिक तंत्र पर गंभीर दबाव पड़ेगा।
जन्म दर में कमी और शादी के प्रति अनिच्छा
चीनी युवाओं के बीच विवाह और संतान को लेकर अनिच्छा बढ़ी है। जीवन-यापन की बढ़ती लागत, उच्च शिक्षा की बढ़ती प्राथमिकता और करियर पर जोर देने की प्रवृत्ति के कारण, युवा पीढ़ी अब पारंपरिक परिवार व्यवस्था की ओर कम आकर्षित हो रही है। इसके परिणामस्वरूप, जन्म दर में गिरावट आई है, जो चीन की जनसंख्या घटने के एक अन्य कारण के रूप में उभर कर सामने आई है।
वहीं, चीन के पड़ोसी देशों जैसे जापान, दक्षिण कोरिया, हांगकांग और अन्य पूर्वी एशियाई देशों में भी जन्म दर में गिरावट देखी जा रही है, जिससे यह संकट क्षेत्रीय स्तर पर और भी जटिल हो गया है।
अर्थव्यवस्था पर असर
कामकाजी उम्र के लोगों की कमी से चीन की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। श्रमिकों की कमी से उत्पादकता पर दबाव पड़ेगा, और रोजगार के अवसर सीमित हो सकते हैं। इसके अलावा, यह स्थिति चीनी श्रम बाजार के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था में विकास की गति धीमी हो सकती है।
चीन के लिए यह समस्या और भी बड़ी है क्योंकि देश ने पिछले दशकों में बहुत कम अप्रवासन की अनुमति दी है, और इस स्थिति में अप्रवासी श्रमिकों का योगदान कम होने से घरेलू श्रम बल की कमी को पूरा करना कठिन होगा।
भविष्य की संभावनाएँ
चीन में जनसंख्या के घटने की यह स्थिति जापान और पूर्वी यूरोप के कई देशों के समान हो रही है, जो पहले ही आबादी घटने और बूढ़ी होती जनसंख्या के साथ संघर्ष कर रहे हैं। यदि यह ट्रेंड जारी रहता है, तो चीन को अपनी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में सुधार करने के लिए बड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। इसके अलावा, यह भी जरूरी होगा कि चीन अपने श्रमिकों की कमी को पूरा करने के लिए अप्रवासन नीति को लेकर नई दिशा अपनाए।
निष्कर्ष
चीन के लिए इस जनसंख्या संकट से निपटना एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि यह केवल सामाजिक और आर्थिक असंतुलन पैदा करेगा, बल्कि देश की विकास दर पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। अब समय आ गया है कि चीन सरकार इस चुनौती का समाधान करने के लिए सशक्त नीतियाँ बनाए, ताकि आने वाले वर्षों में चीन को इसके दुष्प्रभावों से निपटने में मदद मिल सके।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

