Khabarworld24.com –
भारत-कनाडा तनाव के बीच, ‘इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटीजनशिप कनाडा’ (IRCC) द्वारा एक रिपोर्ट पेश की गई है, जिसने कनाडा में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के बीच एक गंभीर समस्या को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा पहुंचे लगभग 20,000 भारतीय छात्र अपने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से “लापता” हैं, यानी उन्हें इन संस्थानों में लंबे समय से नहीं देखा गया है। उन्हें “नो-शो” के रूप में चिह्नित किया गया है, और यह स्थिति उनके अध्ययन परमिट के नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है।
क्या हो रहा है इन छात्रों के साथ?
यह रिपोर्ट कनाडा में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए एक नई चिंता का विषय बन चुकी है। विश्लेषकों का मानना है कि इन छात्रों का अधिकांश हिस्सा कनाडा में ही काम कर रहा है और उनके पास स्थायी निवासी बनने का सपना हो सकता है। उनकी अनुपस्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं: ये छात्र आखिर कहां गए? क्या वे केवल पढ़ाई के लिए कनाडा आए थे, या कुछ अन्य उद्देश्य के लिए?
कनाडा में “इंटरनेशनल स्टूडेंट कम्प्लायंस रिजाइम”
2014 में, कनाडा ने ‘इंटरनेशनल स्टूडेंट कम्प्लायंस रिजाइम’ लागू किया था, जिसका उद्देश्य अवैध छात्रों की पहचान करना और संदिग्ध स्कूलों को चिन्हित करना था। इस रिजाइम के तहत, कनाडा के आव्रजन विभाग ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से साल में दो बार छात्रों की उपस्थिति की रिपोर्ट मांगी। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अंतरराष्ट्रीय छात्र अपने स्टडी परमिट की शर्तों का पालन कर रहे हैं और केवल पढ़ाई के उद्देश्य से कनाडा में हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध तस्करी की जांच
भारतीय छात्रों की अनुपस्थिति की स्थिति ने भारत के प्रवर्तन निदेशालय (ED) का ध्यान भी आकर्षित किया है। प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध तस्करी की जांच कर रहा है, खासकर कनाडा से अमेरिका में भारतीयों की तस्करी के एक मामले को लेकर। इस जांच की शुरुआत उस दुखद घटना से हुई थी, जिसमें गुजरात के डिंगुचा गांच के एक भारतीय परिवार के सदस्य कनाडा-अमेरिका सीमा को अवैध रूप से पार करने की कोशिश करते हुए अत्यधिक ठंड से मारे गए थे।
कनाडा में काम कर रहे छात्र: एक नया ट्रेंड
हेनरी लोटिन, जो एक पूर्व संघीय अर्थशास्त्री और आव्रजन मामलों के विशेषज्ञ हैं, उनका कहना है कि अधिकांश छात्र अमेरिका की सीमा पार नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे कनाडा में ही काम कर रहे हैं। यह स्थिति इस तथ्य को उजागर करती है कि ये छात्र कनाडा में स्थायी रूप से बसने की योजना बना रहे हैं, और इसके लिए वे कानूनी और अवैध दोनों तरीकों का सहारा ले रहे हैं। यह गतिविधि कनाडा की आव्रजन नीतियों के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती है, क्योंकि इससे न केवल कानूनी छात्रों की स्थिति पर असर पड़ सकता है, बल्कि यह मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध तस्करी जैसे अपराधों को भी बढ़ावा दे सकता है।
निष्कर्ष
कनाडा में भारतीय छात्रों की अनुपस्थिति और अवैध गतिविधियों की बढ़ती संख्या पर नजर रखने की आवश्यकता है। जहां एक ओर यह छात्रों के लिए नए अवसरों की संभावना को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह कनाडा की आव्रजन प्रणाली और शिक्षा क्षेत्र के लिए एक गंभीर समस्या उत्पन्न कर सकता है। आव्रजन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे इन छात्रों के मामलों की जांच करें और इस बढ़ते संकट से निपटने के लिए सख्त कदम उठाएं।
संख्या और आंकड़े:
- 20,000 भारतीय छात्र कनाडा में अपने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से “लापता” हैं।
- 2014 में इंटरनेशनल स्टूडेंट कम्प्लायंस रिजाइम लागू किया गया।
- ईडी द्वारा कनाडा से अमेरिका में भारतीयों की तस्करी के मामले की जांच की जा रही है।
यह रिपोर्ट कनाडा में अध्ययन करने वाले भारतीय छात्रों के बीच बढ़ती समस्याओं को उजागर करती है, और आने वाले समय में यह दोनों देशों के संबंधों और शिक्षा नीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

