Khabarworld24.com -रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक भारतीय नागरिक बिनिल टी.बी (32 वर्षीय) की रूसी सेना में सेवा के दौरान मौत और उनके रिश्तेदार जैन टी.बी के घायल होने के बाद भारतीय सरकार ने रूस के समक्ष अपनी मांगों को तेज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना पर गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी और दोनों भारतीय नागरिकों की तत्काल वापसी की मांग दोहराई।
मृतक भारतीय का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाया जाएगा
मंगलवार को जारी बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि रूस में भारतीय दूतावास मृतक बिनिल टी.बी के परिवार के संपर्क में है और उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत वापस लाने के लिए रूस के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। जायसवाल ने कहा, “हम पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं और उनकी हरसंभव सहायता कर रहे हैं।”
बिनिल की पत्नी जाइसी ने अपने पति और उनके घायल रिश्तेदार जैन टी.बी की सुरक्षित भारत वापसी की कई बार मांग की है। मंत्रालय ने कहा है कि घायल जैन का उपचार मॉस्को के एक अस्पताल में चल रहा है, और उसकी भी जल्द वापसी के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
भारतीय नागरिकों के रूस में सेवा देने पर उठे सवाल
इस घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि भारतीय नागरिक रूस-यूक्रेन युद्ध में क्यों शामिल हो रहे हैं। हालांकि, इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वे इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। मंत्रालय ने रूस में रह रहे भारतीय नागरिकों को वहां की स्थिति के मद्देनजर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में बढ़ी भारतीय चिंता
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अब तक कई भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं। इससे पहले भी भारतीय छात्रों और श्रमिकों की सुरक्षित वापसी के मुद्दे पर भारतीय सरकार रूस और यूक्रेन के साथ लगातार बातचीत करती रही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक लगभग 20,000 भारतीय नागरिकों को युद्धग्रस्त क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर लाया गया है। इसके बावजूद, हालिया घटनाएं बताती हैं कि कुछ भारतीय नागरिक अब भी इन खतरनाक क्षेत्रों में रह रहे हैं या काम कर रहे हैं।
आंकड़े और स्थिति का विश्लेषण
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अब तक की घटनाओं से पता चलता है कि कई देशों के नागरिक इस संघर्ष में अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने युद्ध के प्रारंभिक दौर में लगभग 18,000 छात्रों को यूक्रेन से निकाला, जबकि रूस में कार्यरत लगभग 1,500 भारतीय नागरिक भी युद्ध के दौरान विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
हालांकि भारतीय सरकार ने इन नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, फिर भी युद्ध में भारतीय नागरिकों के घायल होने या मौत की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।
निष्कर्ष
बिनिल टी.बी की मौत और जैन टी.बी के घायल होने की घटना भारतीय सरकार के लिए रूस में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर रही है। विदेश मंत्रालय ने रूस के साथ बातचीत तेज कर दी है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी की मांग की जा रही है।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

