khabarworld24.com –नई दिल्ली/वॉशिंगटन – 20 वर्षों के सफल सहयोग का जश्न मनाते हुए, क्वाड समूह (भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका) ने एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता को फिर से मजबूत किया। यह सहयोग चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति और उसके क्षेत्रीय विस्तारवाद पर रोक लगाने के उद्देश्य से और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।
क्वाड की उत्पत्ति और विकास
क्वाड का सफर 2004 में हिंद महासागर में आई भीषण सुनामी के समय आपदा राहत कार्यों में सहयोग से शुरू हुआ था। उस समय भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने एक साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से मदद पहुंचाई थी। उस आपदा प्रबंधन सहयोग ने धीरे-धीरे एक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले लिया, जिसे आज क्वाड के रूप में जाना जाता है।
2007 में क्वाड के पहले सम्मेलन से लेकर 2017 में इसकी पुनः स्थापना और उसके बाद कई उच्च-स्तरीय सम्मेलनों तक, समूह ने अपने उद्देश्य को लगातार व्यापक किया है। अब यह समूह सिर्फ आपदा राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री सुरक्षा, तकनीकी सहयोग, बुनियादी ढांचे के विकास, साइबर सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन और वैश्विक चुनौतियों जैसे मुद्दों पर भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
चीन की चुनौतियों पर फोकस
समूह के हालिया 20वीं वर्षगांठ पर, क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव और आक्रामक नीतियों के खिलाफ मजबूत स्थिति लेने की बात की। बयान में कहा गया कि क्वाड देशों का यह गठबंधन चीन के दादागीरी भरे रवैये को रोकने के लिए तैयार है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की समुद्री गतिविधियों को देखते हुए, समूह ने क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने का संकल्प लिया है।
मैरिटाइम सिक्योरिटी और आपूर्ति श्रृंखला
समुद्री सुरक्षा पर जोर देते हुए, क्वाड के सदस्य देशों ने हिंद महासागर और प्रशांत महासागर में अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए साथ काम करने का वादा किया है। साथ ही, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधारहित और सुरक्षित बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे व्यापारिक संबंधों में स्थिरता और निर्भरता बनी रहे।
आकड़े:
- आपदा राहत: 2004 में हिंद महासागर भूकंप और सुनामी के दौरान, क्वाड देशों ने संयुक्त रूप से $500 मिलियन से अधिक की सहायता और राहत सामग्री भेजी थी।
- सुरक्षा और रक्षा सहयोग: पिछले 5 वर्षों में, क्वाड देशों ने सामूहिक रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा अभ्यासों में 40% की वृद्धि की है।
- टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा: 2022-2024 के दौरान, क्वाड ने साइबर सुरक्षा अवसंरचना के लिए $200 मिलियन का निवेश किया है, जिससे सदस्य देशों की साइबर क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
- आपूर्ति श्रृंखला: कोविड-19 महामारी के दौरान, क्वाड देशों ने वैक्सीन वितरण और चिकित्सा आपूर्ति के लिए एक आपूर्ति श्रृंखला ढांचा तैयार किया, जिससे 100 मिलियन से अधिक टीके प्रशांत द्वीप देशों में वितरित किए गए।
आने वाले वर्ष और क्वाड की रणनीति
आगे की योजनाओं में, क्वाड ने समुद्री सुरक्षा, साइबर सहयोग और क्लाइमेट चेंज के प्रभावों से निपटने पर अधिक जोर देने की घोषणा की है। क्वाड का लक्ष्य है कि 2030 तक क्षेत्र के सभी देशों को तकनीकी और आर्थिक रूप से समर्थ बनाया जा सके ताकि वे चीन की दादागीरी का मजबूती से सामना कर सकें। साथ ही, क्वाड देशों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका गठबंधन किसी भी तीसरे देश को लक्षित करने के लिए नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए है।
निष्कर्ष
क्वाड की 20 साल की यात्रा आपदा प्रबंधन से शुरू होकर रणनीतिक साझेदारी तक पहुंची है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि वे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। साथ ही, चीन की विस्तारवादी नीतियों को रोकने के लिए समूह हर संभव कदम उठाएगा।
खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़

