khabarworld24.com – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग ने दुनियाभर में कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं, लेकिन इसके साथ ही कुछ गहन जोखिम भी उभरकर सामने आए हैं। एआई तकनीक के कारण ‘गुटबंदी’ (Polarization) को बढ़ावा देने की संभावना पर विशेषज्ञों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। हाल ही में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न विशेषज्ञों ने एआई के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक ‘गुटबंदी’ बढ़ने के जोखिमों का आकलन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
एआई द्वारा गुटबंदी बढ़ने की संभावना
विशेषज्ञों के अनुसार, एआई तकनीक की सहायता से सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर ऐसी सामग्री को प्राथमिकता दी जा सकती है, जो लोगों की भावनाओं को भड़काए और समाज में विभाजन की स्थिति पैदा करे। इसके पीछे की तकनीक को ‘एल्गोरिदम’ कहा जाता है, जो उपयोगकर्ताओं की पसंद, विचारधारा और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर उन्हें एक विशेष प्रकार की सामग्री दिखाता है। इससे लोग केवल उन्हीं विचारधाराओं से घिरे रहते हैं, जिनसे वे सहमत हैं, और अन्य विचारों को नकारने लगते हैं, जिससे गुटबंदी बढ़ती है।
सोशल मीडिया और एआई की भूमिका
आंकड़ों के अनुसार, 2023 में लगभग 4.9 अरब लोग सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे थे, जो वैश्विक आबादी का 60% है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्लेटफार्मों पर एआई एल्गोरिदम, जो उपयोगकर्ता की गतिविधियों के अनुसार सामग्री को प्राथमिकता देते हैं, गुटबंदी की भावना को तेज कर सकते हैं। एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि 78% लोग केवल उन्हीं विचारधाराओं को अपनाते हैं जो उनकी अपनी राय से मेल खाती हैं, जिससे विभाजनकारी सोच को बढ़ावा मिलता है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
राजनीतिक दल और सरकारें भी एआई का उपयोग कर सकती हैं, जिससे समाज में विभिन्न गुटों के बीच तनाव और विभाजन बढ़ सकता है। सेंटर फॉर एआई एंड पॉलिटिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के चुनावों के दौरान लगभग 65% डिजिटल कैंपेन एआई द्वारा संचालित थे, जिनमें कई ने समाज में गहरी ध्रुवीकरण की स्थिति पैदा की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इनका नियंत्रण नहीं किया गया तो यह भविष्य में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर सकता है।
संभावित जोखिम और आकलन
विभिन्न संगठनों और शोधकर्ताओं ने एआई से जुड़ी इस समस्या के समाधान की दिशा में कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि एआई की पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करना जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, एआई से उत्पन्न जोखिमों के बारे में सही जानकारी न होने की वजह से 34% देशों में इसके दुरुपयोग की संभावना बढ़ी है।
समाधान की दिशा में प्रयास
वर्तमान में, कई देशों ने एआई के प्रयोग के नियम और दिशा-निर्देश बनाए हैं, लेकिन इन पर सख्ती से अमल करना अब भी एक चुनौती बना हुआ है। एआई विशेषज्ञों का कहना है कि इसके दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए नई तकनीकें और निगरानी प्रणालियों का विकास करना आवश्यक है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) के एक शोध के अनुसार, 2025 तक एआई के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में 15% की बढ़ोतरी हो सकती है, यदि प्रभावी नियंत्रण तंत्र विकसित नहीं किया गया।
निष्कर्ष
एआई तकनीक के बढ़ते उपयोग ने जहां विकास के नए द्वार खोले हैं, वहीं इसके कुछ गंभीर जोखिम भी सामने आए हैं। समाज में गुटबंदी की प्रवृत्ति को बढ़ाने वाले एआई एल्गोरिदम पर नियंत्रण के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस प्रयासों की आवश्यकता है। इसके लिए जरूरी है कि एआई तकनीक को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया जाए, ताकि इसके सकारात्मक उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके और इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सके।
स्रोत:
- सेंटर फॉर एआई एंड पॉलिटिकल रिसर्च
- विश्व आर्थिक मंच (WEF)
- संयुक्त राष्ट्र एआई जोखिम आकलन रिपोर्ट
खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़

