khabarworld24.com –वाशिंगटन: नासा का पार्कर सोलर प्रोब अंतरिक्ष यान, सूर्य के सबसे करीब पहुंचने वाला अब तक का पहला मानव निर्मित यान बन गया है। यह अंतरिक्ष यान 24 दिसंबर 2024 को सूर्य की सतह से मात्र 61 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरा, जो इसे सौर वातावरण, जिसे कोरोना कहते हैं, में ले गया। इस मिशन का उद्देश्य सूर्य के बाहरी वातावरण से डेटा एकत्रित कर वैज्ञानिकों को इसकी संरचना और गतिविधियों के बारे में अधिक जानकारी प्रदान करना है।
1 जनवरी से भेजेगा डाटा
नासा ने 27 दिसंबर 2024 को बताया कि पार्कर सोलर प्रोब की स्थिति सामान्य और सुरक्षित है। यह यान 1 जनवरी 2025 से अपनी स्थिति और खोजों का विस्तृत डाटा पृथ्वी पर भेजना शुरू करेगा। मैरीलैंड में जॉन्स हॉपकिन्स एप्लाइड फिजिक्स लैबोरेटरी की टीम को यान से दो दिन पहले एक बीकन टोन (सिग्नल) प्राप्त हुआ था, जो इस बात की पुष्टि करता है कि यान सही तरीके से काम कर रहा है।
अविश्वसनीय रफ्तार और उच्च तापमान
नासा के अनुसार, पार्कर सोलर प्रोब 692,000 किलोमीटर प्रति घंटे की अविश्वसनीय रफ्तार से सूर्य की ओर बढ़ रहा था। साथ ही, इसने 982 डिग्री सेल्सियस तक के अत्यधिक तापमान को सहन किया।
मिशन के वैज्ञानिक उद्देश्य
नासा का यह मिशन सूर्य के बारे में कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर ढूंढने का प्रयास कर रहा है:
- कोरोना का तापमान: यह अध्ययन किया जा रहा है कि सूर्य का बाहरी वातावरण (कोरोना) लाखों डिग्री तक कैसे गर्म हो जाता है, जबकि सूर्य की सतह की अपेक्षाकृत कम तापमान होती है।
- सौर पवन: यान यह जानने का प्रयास कर रहा है कि सूर्य से निकलने वाले कणों की धारा, जिसे सौर पवन कहा जाता है, कहाँ उत्पन्न होती है।
- कणों की गति: वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन भी कर रहे हैं कि कुछ कण कैसे प्रकाश की गति के करीब पहुंचकर तेजी से यात्रा करते हैं।
मिशन की शुरुआत और प्रगति
पार्कर सोलर प्रोब को 12 अगस्त 2018 को लॉन्च किया गया था। इसे सूर्य के सबसे करीब पहुंचने के लिए डिज़ाइन किया गया था। अपने मिशन के दौरान, यान ने शुक्र ग्रह के पास से कई बार गुज़रते हुए अपनी कक्षा को सूर्य के और करीब खींचा है। यह यान 2025 तक सौर वातावरण का गहन अध्ययन करेगा, जो सौर पवन और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) जैसे प्रमुख सौर घटनाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।
अंतरिक्ष यान की उपलब्धियां
इस मिशन के डेटा से वैज्ञानिकों को यह समझने में सहायता मिल रही है कि:
- कोरोना की संरचना कैसी है और इसका तापमान लाखों डिग्री तक क्यों बढ़ जाता है।
- सौर पवन का सटीक उत्पत्ति स्थान क्या है और इसका व्यवहार किस प्रकार होता है।
- सूर्य के चारों ओर के ऊर्जावान कणों की गति और उनकी संरचना कैसी होती है।
मिशन का महत्व
पार्कर सोलर प्रोब द्वारा जुटाए गए आंकड़े सौर गतिविधियों को समझने और उनकी भविष्यवाणी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे न केवल अंतरिक्ष मौसम की बेहतर भविष्यवाणी की जा सकेगी, बल्कि यह धरती पर मौजूद विद्युत प्रणालियों और संचार उपग्रहों को संभावित सौर तूफानों से बचाने में भी मदद करेगा।
निष्कर्ष
नासा का पार्कर सोलर प्रोब मिशन एक ऐतिहासिक उपलब्धि है जो हमें सूर्य के रहस्यमय बाहरी वातावरण के बारे में अद्वितीय जानकारी प्रदान करेगा। इस मिशन से प्राप्त डेटा भविष्य में सौर गतिविधियों को समझने और उनके प्रभावों को कम करने में सहायक होगा, जिससे धरती पर मौजूद जीवन और तकनीक पर पड़ने वाले सौर तूफानों के प्रभाव को कम किया जा सकेगा।
तथ्य और आंकड़े:
- यान की गति: 692,000 किलोमीटर प्रति घंटा
- अधिकतम तापमान: 982 डिग्री सेल्सियस
- सूर्य से निकटतम दूरी: 61 लाख किलोमीटर
- लॉन्च तिथि: 12 अगस्त 2018
- डेटा भेजने की शुरुआत: 1 जनवरी 2025
(स्रोत: नासा)
खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़

