khabarworld24.com – हाल ही में संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने ‘क्षेत्रीय- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैश्विक आतंकवाद का मुकाबला’ विषय पर अपनी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में आतंकवाद के तेजी से बढ़ते खतरों, खासकर एशिया और अफ्रीका जैसे नए क्षेत्रों में इसके पांव पसारने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। इसके साथ ही समिति ने घरेलू और वैश्विक आतंकवाद से निपटने के लिए सरकार को एक समन्वित और व्यापक रणनीति अपनाने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारत में होने वाले आतंकी हमलों के पीछे पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की सबसे बड़ी भूमिका है।
आतंकवाद का क्षेत्रीय और वैश्विक विस्तार
समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि आतंकवादी संगठनों का प्रभाव न केवल भारत तक सीमित है, बल्कि अब एशिया और अफ्रीका के कुछ देशों में भी ये संगठन अपनी गतिविधियां तेजी से बढ़ा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, अफ्रीकी देशों में अल-शबाब और बोको हराम जैसे संगठन और एशियाई देशों में तालिबान और अल-कायदा की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। आतंकवादी संगठनों का यह विस्तार उनकी रणनीतिक क्षमता और वित्तीय नेटवर्क को मजबूत कर रहा है, जिससे वैश्विक सुरक्षा को गंभीर चुनौती मिल रही है।
भारत में आईएसआई और पाकिस्तान का हाथ
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में होने वाले कई आतंकी हमलों के पीछे पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है। आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2023 के बीच भारत में आतंकवाद से जुड़े 100 से अधिक बड़े हमले हुए हैं, जिनमें करीब 700 लोगों की मौत हुई है। इन हमलों में उरी (2016), पुलवामा (2019), और पठानकोट (2016) जैसे बड़े आतंकी हमले शामिल हैं, जिनकी साजिश पाकिस्तान में रची गई थी। समिति ने सिफारिश की है कि भारत को वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजित करने वाला देश घोषित करने के लिए मजबूत प्रयास करने चाहिए।
नई तकनीक और आतंकवाद
समिति ने एक अहम चिंता जताई है कि आतंकवादी संगठनों द्वारा नई प्रौद्योगिकियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन, क्रिप्टोकरेंसी, और सोशल मीडिया का प्रयोग करके आतंकवादी न केवल अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं, बल्कि भर्ती और धन एकत्रित करने के भी नए तरीके अपना रहे हैं। हाल ही में, कश्मीर में ड्रोन के माध्यम से हथियार और ड्रग्स भेजने की कई घटनाएं सामने आई हैं। 2022 में, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 35 से अधिक ड्रोन-आधारित हथियार सप्लाई नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था।
सरकार के लिए सिफारिशें
समिति ने आतंकवाद से निपटने के लिए निम्नलिखित प्रमुख सिफारिशें दी हैं:
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राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी रणनीति: सरकार को घरेलू आतंकवाद के खिलाफ एक समग्र और समन्वित नीति बनाने की जरूरत है, जिसमें खुफिया तंत्र, सीमा सुरक्षा, और साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जाए।
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वैश्विक मंच पर सक्रियता: भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ अपने प्रयासों को और तेज करना चाहिए और विशेष रूप से पाकिस्तान को आतंकवाद का संरक्षक देश घोषित करने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाना चाहिए।
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तकनीकी निगरानी का विस्तार: आतंकवादी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए उन्नत तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन निगरानी का व्यापक उपयोग किया जाए।
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साइबर आतंकवाद का मुकाबला: इंटरनेट और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से निपटने के लिए सख्त साइबर कानून बनाए जाएं। इसके लिए इंटरपोल और अन्य वैश्विक एजेंसियों के साथ तालमेल बैठाकर साइबर सुरक्षा तंत्र को और मजबूत किया जाए।
आतंकवाद के आर्थिक प्रभाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि आतंकवाद से न केवल सुरक्षा को खतरा है, बल्कि इसके आर्थिक प्रभाव भी गंभीर हैं। भारत में पिछले एक दशक में हुए आतंकी हमलों के कारण देश की जीडीपी को 1.5% का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, पर्यटन और विदेशी निवेश पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ा है। उदाहरणस्वरूप, जम्मू-कश्मीर में 2019 के पुलवामा हमले के बाद पर्यटन में 40% की गिरावट दर्ज की गई थी।
निष्कर्ष
समिति की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि आतंकवाद अब एक वैश्विक समस्या बन चुका है, जिससे निपटने के लिए एक समग्र और दीर्घकालिक दृष्टिकोण आवश्यक है। भारत को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मोर्चों पर सतर्क रहते हुए आतंकवाद के खिलाफ अपने प्रयासों को और सशक्त बनाने की जरूरत है।
इस रिपोर्ट के आने के बाद, सरकार के पास अब यह जिम्मेदारी है कि वह इन सिफारिशों पर तेजी से अमल करे और देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाए।
खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़

