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अमेरिका के H-1B वीजा प्रोग्राम में हाल ही में किए गए बदलाव भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं। ये परिवर्तन 17 जनवरी 2025 से प्रभावी होंगे और वीजा प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल बनाएंगे।
मुख्य बदलाव:
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‘स्पेशलिटी ऑक्यूपेशन’ की परिभाषा में संशोधन:
- अब, H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों को अपनी डिग्री को सीधे संबंधित क्षेत्र से जोड़ना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उम्मीदवार की योग्यता नौकरी की आवश्यकताओं से मेल खाती है।
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नॉन-प्रॉफिट और सरकारी अनुसंधान संगठनों के लिए लचीलापन:
- इन संगठनों को H-1B वीजा प्राप्त करने में अब अधिक सुविधा होगी। पहले, अनुसंधान को मुख्य गतिविधि माना जाता था, लेकिन अब इसे मौलिक गतिविधि माना जाएगा।
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F-1 स्टूडेंट वीजा एक्सटेंशन:
- यदि कोई व्यक्ति F-1 स्टूडेंट वीजा पर है और H-1B वीजा के लिए आवेदन करता है, तो उसके स्टूडेंट वीजा की वैधता H-1B वीजा प्रोसेसिंग के दौरान स्वतः बढ़ जाएगी।
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‘प्रायर डेफरेंस’ पॉलिसी की बहाली:
- पहले, H-1B वीजा एक्सटेंशन के लिए पूरी प्रक्रिया को फिर से पूरा करना पड़ता था। अब, ‘प्रायर डेफरेंस’ पॉलिसी लागू होने से, पूर्व में प्राप्त वीजा के आधार पर एक्सटेंशन आसानी से मिल सकेगा।
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लॉटरी सिस्टम में सुधार:
- डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन को रोकने के लिए लॉटरी सिस्टम में सुधार किया गया है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।
आंकड़े:
- अमेरिका हर साल 65,000 H-1B वीजा जारी करता है।
- इसके अतिरिक्त, 20,000 वीजा उन व्यक्तियों को मिलते हैं जिन्होंने अमेरिकी विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त की है।
इन परिवर्तनों से भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए अमेरिका में करियर बनाने के अवसर बढ़ेंगे, साथ ही वीजा प्राप्ति की प्रक्रिया भी सरल होगी।
खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़

