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श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने भारत के साथ श्रीलंका के मजबूत और ऐतिहासिक संबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब श्रीलंका कठिन दौर से गुजर रहा था, तब भारत ने उसे सहायता प्रदान की और वह इसके लिए आभारी हैं। विक्रमसिंघे ने स्पष्ट किया कि श्रीलंका अपनी जमीन का उपयोग भारत के खिलाफ होने नहीं देगा और दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया।
भारत की मदद: आर्थिक संकट के दौरान सहयोग
श्रीलंका को 2022-2023 में अपने सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा था, जिसमें खाद्य, ईंधन और दवाओं की भारी कमी हो गई थी। इस समय भारत ने श्रीलंका की मदद के लिए कई प्रकार की वित्तीय और आपातकालीन सहायता प्रदान की। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
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वित्तीय सहायता: भारत ने श्रीलंका को $4 बिलियन (लगभग 32,000 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता दी, जिसमें ऋण, लाइन ऑफ क्रेडिट और अन्य सहायता शामिल थीं।
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ईंधन आपूर्ति: भारत ने उस संकट के दौरान श्रीलंका को हजारों टन पेट्रोलियम उत्पाद भेजे, जिससे वहां की गंभीर ऊर्जा संकट से राहत मिली।
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खाद्य और दवा आपूर्ति: भारत ने श्रीलंका को भोजन, दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराईं, जिससे देश के लोगों को जीवन रक्षक सहायता मिल सकी।
भू-राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने यह भी कहा कि श्रीलंका की भू-राजनीतिक स्थिति महत्वपूर्ण है, और वह सुनिश्चित करेंगे कि श्रीलंका की जमीन का उपयोग कभी भी भारत के खिलाफ न हो। इस बयान को चीन के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में देखा जा सकता है, क्योंकि चीन ने श्रीलंका में बड़े पैमाने पर निवेश किया है, जिसमें हंबनटोटा पोर्ट जैसे रणनीतिक स्थान शामिल हैं। हालांकि, श्रीलंका भारत के साथ अपने दीर्घकालिक सुरक्षा और व्यापारिक संबंधों को प्राथमिकता देने का इरादा रखता है।
विक्रमसिंघे ने भारत-श्रीलंका संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:
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सुरक्षा साझेदारी: भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियान जैसे मुद्दों पर गहरा सहयोग है। विक्रमसिंघे ने कहा कि यह साझेदारी जारी रहेगी।
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व्यापार और निवेश: भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। 2023 में दोनों देशों के बीच व्यापार $5 बिलियन (लगभग 40,000 करोड़ रुपये) से अधिक का हुआ, जिसमें मुख्य रूप से कृषि, वस्त्र, और औद्योगिक उत्पाद शामिल थे।
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सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध: भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं, जिनमें बौद्ध धर्म और तमिल समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रपति ने कहा कि ये सांस्कृतिक संबंध दोनों देशों के लोगों के बीच और अधिक आपसी समझ को बढ़ावा देंगे।
भारत के प्रति समर्थन जारी रहेगा
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने कहा कि भारत श्रीलंका का एक स्थायी मित्र है, और उनकी सरकार भारत के साथ हर क्षेत्र में सहयोग जारी रखेगी। उन्होंने भारत द्वारा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निभाई जा रही भूमिका की भी सराहना की और कहा कि श्रीलंका हमेशा एक सकारात्मक और रचनात्मक साझेदार बना रहेगा।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे के बयान ने एक बार फिर से भारत-श्रीलंका संबंधों को नई मजबूती दी है। भारत द्वारा संकट के समय में की गई मदद को न सिर्फ स्वीकार किया गया, बल्कि श्रीलंका की भू-राजनीतिक नीतियों में भारत के हितों को प्राथमिकता दी गई। आने वाले वर्षों में, इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा सहयोग और भी मजबूत होने की उम्मीद है।
खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़ –

