khabarworld24.com – भारत और कनाडा के बीच हाल के समय में कूटनीतिक संबंधों में तनाव एक बार फिर से गहरा गया है। इस बार मुद्दा है भारत द्वारा कनाडा के नागरिकों को वीजा देने से इनकार करना। कनाडा की सरकार ने हाल ही में भारत से अनुरोध किया था कि उनके नागरिकों को भारत का वीजा दिया जाए। इस मुद्दे पर कनाडा की मीडिया में भी कई खबरें प्रकाशित हुईं, जिनमें भारत की नीतियों पर सवाल उठाए गए। इन खबरों ने भारत-कनाडा के संबंधों पर गहरा असर डाला, और अब भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर करारा जवाब दिया है।
विदेश मंत्रालय का कड़ा जवाब
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कनाडाई मीडिया की इन रिपोर्टों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भारत किसे वीजा देगा, यह पूरी तरह से भारत का अधिकार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हमारी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ काम करने वाले लोगों को वीजा न देने का फैसला भारत का संप्रभु अधिकार है। हम देश विरोधी तत्वों को किसी भी कीमत पर वीजा नहीं देंगे।”
मंत्रालय ने आगे कहा, “हमने कनाडाई मीडिया की ओर से ऐसी भ्रामक खबरें देखी हैं, जो भारत को बदनाम करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं। ये कनाडाई मीडिया द्वारा दुष्प्रचार का एक और उदाहरण हैं।”
कनाडाई मीडिया में आरोप
कनाडाई मीडिया में कई खबरें आई हैं, जिनमें आरोप लगाए गए हैं कि भारत जानबूझकर कनाडा के नागरिकों को वीजा नहीं दे रहा है। इन खबरों में यह भी दावा किया गया कि भारत सरकार की वीजा नीतियां कनाडाई नागरिकों के साथ भेदभावपूर्ण हैं। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया कि उसका निर्णय उन लोगों के खिलाफ है, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं, न कि कनाडाई आम नागरिकों के खिलाफ।
भारत का पक्ष: आंकड़ों पर नज़र
भारत के इस निर्णय के पीछे एक ठोस रणनीति है, जिसमें उन समूहों और व्यक्तियों की पहचान की जा रही है, जो भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं। 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2 लाख से अधिक कनाडाई नागरिकों को विभिन्न उद्देश्यों के लिए वीजा जारी किए थे, जिसमें व्यापार, पर्यटन, और शैक्षिक वीजा शामिल थे। लेकिन यह संख्या उन लोगों पर लागू नहीं होती, जो भारत के खिलाफ काम कर रहे हैं या खालिस्तानी आंदोलन जैसे अलगाववादी गतिविधियों में संलिप्त हैं।
खालिस्तानी गतिविधियों का प्रभाव
भारत सरकार का मानना है कि कनाडा में सक्रिय कुछ समूह खालिस्तान समर्थक गतिविधियों में शामिल हैं, जो भारत की क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। इन समूहों को कनाडा सरकार से मिली अप्रत्यक्ष सहायता के चलते भारत ने ऐसे व्यक्तियों को वीजा न देने का फैसला किया है। खालिस्तानी गतिविधियों पर भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है, और इसे राष्ट्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना गया है।
भारत-कनाडा संबंधों पर प्रभाव
भारत और कनाडा के बीच इस वीजा विवाद ने दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और बिगाड़ दिया है। सितंबर 2023 में भारतीय सरकार ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार पर खालिस्तानी आतंकवादियों को प्रश्रय देने के आरोप लगाए थे, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी। इस नए घटनाक्रम ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है।
निष्कर्ष
भारत का कनाडाई नागरिकों को वीजा न देने का निर्णय राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति उसकी सख्त नीतियों का प्रमाण है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ किसी भी प्रकार की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा, चाहे वह किसी भी देश के नागरिक क्यों न हों। यह कदम दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को और जटिल बना सकता है, लेकिन भारत अपने राष्ट्रीय हितों के खिलाफ किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।
खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़

