खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़- भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर भारत-रूस रक्षा सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा की। यह वार्ता भारत-रूस अंतर-सरकारी सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग आयोग (आईआरआईजीसी एमएंडएमटीसी) के 21वें सत्र के अवसर पर हुई। इस दौरान द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के विभिन्न पहलुओं और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से बात हुई।
एस-400 मिसाइल प्रणाली पर जोर
राजनाथ सिंह ने रूसी अधिकारियों से सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल प्रणाली की शेष इकाइयों की आपूर्ति में तेजी लाने की अपील की। उन्होंने रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के साथ भी व्यापक वार्ता की, जिसमें सैन्य हार्डवेयर के संयुक्त उत्पादन और भारतीय रक्षा उद्योग के लिए नए अवसरों पर चर्चा की गई।
अब तक रूस ने एस-400 प्रणाली की पहली तीन रेजिमेंट की आपूर्ति पूरी कर ली है। हालांकि, यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के कारण शेष दो रेजिमेंट की डिलीवरी में देरी हो रही है। भारत ने इस डिलीवरी को शीघ्र पूरा करने पर विशेष बल दिया है।
भारत-रूस साझेदारी के मजबूत आयाम
राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत और रूस के बीच मित्रता सबसे ऊंचे पर्वत से भी ऊंची और सबसे गहरे महासागर से भी गहरी है।” उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी में असीमित संभावनाओं की बात करते हुए कहा कि संयुक्त प्रयास उल्लेखनीय परिणामों का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
राष्ट्रपति पुतिन ने भी भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत-रूस साझेदारी वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा में योगदान देती है।
रक्षा उत्पादन में भारत का बढ़ता कदम
राजनाथ सिंह ने भारत में रूसी रक्षा कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि भारतीय रक्षा क्षेत्र में नए अवसर उभर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत अपने सैन्य उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है।
इस बैठक के दौरान भारत ने रूस के साथ रक्षा उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को लेकर मजबूत इच्छाशक्ति व्यक्त की।
दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी
भारत-रूस संबंधों को विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया है। दोनों देशों ने 2021 में 43 बिलियन डॉलर के रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें एस-400 प्रणाली सबसे प्रमुख है।
यूक्रेन संघर्ष का प्रभाव
रूस-यूक्रेन संघर्ष के चलते भारत और रूस के बीच रक्षा आपूर्ति में कुछ बाधाएं आई हैं, लेकिन दोनों देशों ने इस संकट से उबरने के लिए आपसी संवाद बढ़ाने पर सहमति जताई है।
निष्कर्ष:
इस वार्ता से यह स्पष्ट होता है कि भारत और रूस के रक्षा संबंध और अधिक मजबूत हो रहे हैं। एस-400 प्रणाली की शीघ्र डिलीवरी और रक्षा उत्पादन में सहयोग जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और गहरा करेंगे।
मुख्य बिंदु
- एस-400 मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति में तेजी लाने पर जोर।
- भारत में रक्षा उत्पादन के लिए रूसी कंपनियों को आमंत्रण।
- यूक्रेन संघर्ष के बावजूद भारत-रूस साझेदारी में मजबूती।
- ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त रक्षा उत्पादन पर फोकस।
यह वार्ता भारत-रूस संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने में सहायक सिद्ध होगी।
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