Khabarworld24 – एचपीजेड टोकन एप के जरिये ठगी मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारत व दुबई में 106.20 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। इनमें कुछ चीनी शेल कंपनियों की संपत्तियां भी शामिल हैं। इस एप के जरिये निवेशकों को 57 हजार रुपये के निवेश पर तीन महीने तक रोजाना चार हजार रुपये का रिटर्न देने का वादा कर ठगा गया था। इस मामले में पहले भी कुछ संपत्तियों की कुर्की हो चुकी है। ईडी के मुताबिक, जिन चीनी शेल कंपनियों की संपत्ति अटैच की गई हैं, उन्होंने एचपीजेड टोकन एप पर भारी रिटर्न का झांसा देकर निवेश कराया था। ये कंपनियां ऑनलाइन गेमिंग व बेटिंग वेबसाइट भी चलाती थीं। ईडी ने मार्च में आरोपपत्र दाखिल कर 299 संस्थाओं को आरोपी बनाया है। इनमें 76 चीन नियंत्रित संस्थाएं हैं, जिनमें 10 निदेशक चीनी मूल के हैं। ईडी ने कोहिमा पुलिस की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की थी।
भारत और दुबई में चीन की कंपनियों की कुल 106 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की का मामला एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटना है, जो न केवल व्यापारिक और आर्थिक दृष्टिकोण से बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इस मामले में, चीन की कंपनियों के खिलाफ भारतीय और दुबई अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई से कुछ प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु और विश्लेषण:
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चीन की कंपनियों के खिलाफ संपत्ति कुर्की:
- भारत और दुबई में चीन की कंपनियों की संपत्तियां कुर्क करने का कदम, चीन और इन देशों के बीच चल रहे व्यापारिक विवाद और सुरक्षा चिंताओं के संदर्भ में उठाया गया है। भारत में चीन की कई कंपनियों के खिलाफ पहले से ही कार्रवाई हो रही थी, खासतौर पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से।
- इस कार्रवाई का उद्देश्य चीन से जुड़ी कंपनियों को उनके कथित आर्थिक और सुरक्षा उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराना है। भारत और दुबई ने चीन की कुछ कंपनियों द्वारा विभिन्न प्रकार के वित्तीय अपराधों, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य धोखाधड़ी गतिविधियों की जांच की है।
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भारत का दृष्टिकोण:
- भारत में चीन के खिलाफ व्यापारिक नीति और सुरक्षा से जुड़े कई कदम उठाए गए हैं। यह कदम 2020 में गलवान घाटी में चीन के साथ सीमा विवाद के बाद से तेज हो गए थे। इसके बाद भारत ने कई चीनी कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंध और जांच की प्रक्रिया को तेज किया था, जिनमें प्रमुख रूप से टेक्नोलॉजी कंपनियाँ शामिल हैं।
- चीन की कंपनियों को भारत में कुछ क्षेत्रों, जैसे कि 5G नेटवर्क और अन्य महत्वपूर्ण उद्योगों में, भागीदारी से रोका गया है, और उनके खिलाफ जांच में मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के मामलों की बढ़ोतरी हुई है।
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दुबई में संपत्ति कुर्की:
- दुबई ने भी भारत के साथ समन्वय करते हुए चीन की कंपनियों की संपत्तियां कुर्क की हैं। दुबई एक महत्वपूर्ण वित्तीय केंद्र है, और यह कदम व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियों को लेकर एक स्पष्ट संदेश भेजता है कि वैश्विक स्तर पर चीन की कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
- दुबई में स्थित संपत्तियां कुर्क करने का यह कदम वित्तीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के संदर्भ में चीन की कंपनियों की नकेल कसने के लिए महत्वपूर्ण है। दुबई में स्थित इन कंपनियों के संपत्ति का समन्वय अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के साथ हुआ था।
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भू-राजनीतिक और आर्थिक संदर्भ:
- यह कदम भारत और दुबई के बीच चीन के आर्थिक प्रभाव को सीमित करने की रणनीति का हिस्सा है। चीन के खिलाफ व्यापारिक प्रतिबंधों का एक नया दौर शुरू हो चुका है, और इसे वैश्विक स्तर पर समर्थन मिल रहा है।
- भारत ने यह कदम चीन की आर्थिक शक्ति को चुनौती देने के लिए उठाया है। भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव, विशेष रूप से सीमा विवादों और व्यापारिक असंतुलन को देखते हुए, भारत ने अपनी सुरक्षा और हितों को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है।
- इस तरह की संपत्ति कुर्की न केवल व्यापारिक और वित्तीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह चीन के आर्थिक प्रभाव को कम करने की एक रणनीतिक पहल भी है।
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मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराध:
- चीन की कंपनियों के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, वे मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के शामिल हैं। कई रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि इन कंपनियों ने अन्य देशों में वित्तीय नियमों का उल्लंघन किया है और भारत तथा दुबई की सरकारों ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
- भारत और दुबई में इस तरह की संपत्ति कुर्की का मकसद चीन के मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को तोड़ना और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक धोखाधड़ी पर नकेल कसना है।
निष्कर्ष:
भारत और दुबई में चीन की कंपनियों की संपत्तियों की कुर्की एक बड़े वैश्विक कदम का हिस्सा है, जो चीन के व्यापारिक और आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए उठाया गया है। यह कदम मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी, और सुरक्षा उल्लंघनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रतीक है। भारत और दुबई दोनों ही देशों के लिए यह कदम चीन के आर्थिक और व्यापारिक नेटवर्क को नियंत्रित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण है। यह भी संकेत करता है कि वैश्विक स्तर पर चीन के व्यापारिक प्रभाव को सीमित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, जो भविष्य में अन्य देशों में भी फैल सकता है।
खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर।-बालकृष्ण साहू