Khabarworld24 – अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कनाडा और मेक्सिको से आयात पर शुल्क लगाने का निर्णय 2018 में व्यापार युद्ध (trade war) के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम था। यह कदम अमेरिका की आर्थिक नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, और व्यापारिक रिश्तों पर गहरे असर डालने वाला था। ट्रंप ने “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत इस निर्णय को लिया, जिससे उन्होंने अमेरिकी श्रमिकों और उद्योगों को सुरक्षा प्रदान करने का दावा किया। इस निर्णय का प्रभाव केवल अमेरिका के तीन प्रमुख साझेदारों (कनाडा, मेक्सिको, और अमेरिका) पर ही नहीं पड़ा, बल्कि यह वैश्विक व्यापार व्यवस्था और अन्य देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों को भी प्रभावित करने वाला था।
1. ट्रंप के शुल्क नीति का उद्देश्य:
ट्रंप ने यह कदम इस उद्देश्य से उठाया था कि अमेरिका के ट्रेड डिफिसिट (व्यापार घाटा) को कम किया जाए और अमेरिकी उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया जाए। उनका मानना था कि अमेरिका अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ “न्यायसंगत” व्यापार नहीं कर रहा है, और यह कदम अमेरिका की रक्षा के लिए आवश्यक था। ट्रंप ने विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, स्टील, और एल्यूमिनियम जैसे क्षेत्रों में आयात शुल्क बढ़ाने की योजना बनाई।
2. आयात शुल्क की संरचना और इससे प्रभावित क्षेत्र:
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स्टील और एल्यूमिनियम पर शुल्क: ट्रंप प्रशासन ने स्टील और एल्यूमिनियम पर 25% और 10% का आयात शुल्क लागू किया था। यह विशेष रूप से चीन, कनाडा और मेक्सिको जैसे देशों से आने वाले स्टील और एल्यूमिनियम उत्पादों पर था। इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देना और घरेलू उत्पादन को सुरक्षित करना था।
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ऑटोमोबाइल शुल्क: ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि वह ऑटोमोबाइल के आयात पर 25% का शुल्क लागू कर सकते हैं, खासकर उन देशों पर जिनसे अमेरिका के व्यापार घाटे में वृद्धि हो रही है। इस नीति का मकसद अमेरिकी वाहन निर्माताओं को विदेशों से आयात होने वाले वाहनों और पुर्जों से प्रतिस्पर्धा में लाभ दिलाना था।
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कनाडा और मेक्सिको: कनाडा और मेक्सिको से आयात पर शुल्क लगाने का निर्णय अमेरिकी घरेलू उत्पादकों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया था, क्योंकि दोनों देशों से अमेरिका को बड़े पैमाने पर स्टील और ऑटोमोबाइल आयात होते थे।
3. ट्रेड वॉर और व्यापारिक रिश्ते:
यह कदम कनाडा और मेक्सिको के साथ अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों पर गहरा असर डालने वाला था। दोनों देशों ने अमेरिका के इस निर्णय का विरोध किया और कई ट्रेड सुधारों की मांग की। विशेष रूप से, कनाडा ने इस नीति को ‘अन्यथा गैर-कानूनी’ और ‘अमेरिका के सहयोगी देशों के प्रति अनुचित’ कहा।
मेक्सिको ने भी अमेरिका के खिलाफ आयात शुल्क के कारण अपने आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला किया, जो एक प्रकार से व्यापार युद्ध (trade war) की स्थिति पैदा कर रहा था। दोनों देशों ने ट्रंप के कदम का जवाब देने के लिए शुल्क और किमती सीमा बढ़ाने के उपायों पर विचार किया।
4. NAFTA का पुनर्विकास (USMCA):
ट्रंप प्रशासन ने इस नीति का एक और पहलू पेश किया: NAFTA (उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता) का पुनर्निर्माण। ट्रंप ने NAFTA को “अमेरिका के लिए खराब समझौता” करार दिया था और इसके स्थान पर USMCA (संयुक्त राज्य-मेक्सिको-कनाडा समझौता) की शुरुआत की। USMCA में कई प्रमुख बदलाव किए गए, जिसमें प्रमुख रूप से कनाडा और मेक्सिको से अमेरिका में आयातित उत्पादों पर शुल्क में बदलाव और व्यापार की शर्तों में कड़े नियम शामिल थे।
5. आयात शुल्क का आर्थिक प्रभाव:
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अमेरिकी उद्योगों पर प्रभाव: इस कदम का अमेरिकी उद्योगों पर मिश्रित प्रभाव पड़ा। कुछ अमेरिकी उद्योगों जैसे कि स्टील, एल्यूमिनियम और ऑटो उद्योगों ने इसे सकारात्मक रूप से देखा, क्योंकि इससे उन्हें विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा मिली। लेकिन कुछ उद्योगों ने इस कदम का विरोध किया, यह दावा करते हुए कि इससे उनके उत्पादन लागत में वृद्धि होगी, जो अंततः उपभोक्ताओं पर भार डालेगा।
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कनाडा और मेक्सिको की प्रतिक्रिया: कनाडा और मेक्सिको ने अमेरिका के इस कदम का विरोध किया और अपनी संबंधित देशों से आयात पर जवाबी शुल्क लगाने की योजना बनाई। कनाडा ने अमेरिका से आने वाले कई प्रमुख उत्पादों पर शुल्क लगाए, जैसे कि कच्चा तेल, शराब और कृषि उत्पाद। मेक्सिको ने भी इसी तरह के शुल्क लगाने की योजना बनाई।
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वैश्विक व्यापार पर असर: ट्रंप के इस निर्णय ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अस्थिर कर दिया, क्योंकि यह कई देशों के बीच ट्रेड वार की शुरुआत थी। कई देशों ने अमेरिका के कदम के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शिकायतें कीं, यह आरोप लगाते हुए कि यह वैश्विक व्यापार के नियमों का उल्लंघन है।
6. राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव:
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अमेरिकी चुनाव पर प्रभाव: ट्रंप की यह नीति उनके आधार वोटों के बीच लोकप्रिय रही, विशेष रूप से उन अमेरिकी श्रमिकों के बीच जो विदेशी प्रतिस्पर्धा के कारण अपनी नौकरियों को खो रहे थे। हालांकि, व्यापारिक रिश्तों में तनाव और कूटनीतिक जटिलताओं के कारण, यह नीति कुछ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आलोचना का कारण बनी।
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कनाडा और मेक्सिको से तनाव: ट्रंप के निर्णय ने अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों के साथ रिश्तों में तनाव पैदा किया। हालांकि, USMCA के तहत कुछ समझौते हुए थे, फिर भी यह व्यापारिक साझेदारों के बीच भरोसे की कमी और असहमति का कारण बना।
7. निष्कर्ष:
डोनाल्ड ट्रंप का कनाडा और मेक्सिको से आयात पर शुल्क लगाने का निर्णय एक मजबूत व्यापारिक दृष्टिकोण था, जिसमें अमेरिकी व्यापारिक हितों की रक्षा की बात की गई थी। हालांकि, यह निर्णय व्यापारिक युद्ध, कूटनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव डालने का कारण बना। ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए फायदेमंद कदम बताया, लेकिन इसे अन्य देशों के साथ रिश्तों में तनाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का कारण भी माना गया।
खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर।-बालकृष्ण साहू

