नई दिल्ली। रंगों को त्योहार होली 4 मार्च को मनाया जाने वाला है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इस त्योहार के रंग में मदमस्त रहते हैं। इस दिन लोग अपनों के साथ बिना किसी चिंता फिक्र के बस रंगों से खेलते, नाचते और गाते हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है, जब इन रंगों को त्वचा और बालों से निकाला जाता है। होली खेलने वाले कई लोगों को बाद में त्वचा और सिर की त्वचा (स्कैल्प) में जलन या परेशानी की समस्या होती है।
मैक्स मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पंचशील पार्क में डर्मेटोलॉजी प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉक्टर निधि रोहतगी ने बातचीत में हमें बताया कि अधिकांश होली के रंगों में सीसा (लेड), सिंथेटिक डाई और आर्टिफिशियल पिगमेंट पाए जाते हैं। ये कठोर रसायन बालों की बाहरी परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके कारण होली के बाद बाल सूखे, बेजान, उलझे हुए, खुरदरे और आसानी से टूटने वाले हो सकते हैं।
डॉक्टर बताती हैं कि केमिकल वाले ये रंग सिर्फ बालों को ऊपरी रूप से डैमेज नहीं करते हैं, बल्कि स्कैल्प को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इससे खुजली, लालिमा, जलन, सूजन और कुछ मामलों में स्कैल्प इंफेक्शन तक हो सकता है। अगर रंग लंबे समय तक सिर पर लगा रहे तो परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि, स्कैल्प बर्न होने की भी संभावना होती है लेकिन ऐसे मामले रेयर होते हैं।25 से अधिक वर्षों के क्लिनिकल अनुभव में मैंने होली के रंगों से सीधे स्कैल्प बर्न का कोई मामला नहीं देखा है।
डॉक्टर ने बताया कि दिलचस्प बात यह है कि कई बार असली नुकसान रंगों से नहीं, बल्कि उन्हें हटाने के तरीके से होता है। रंग छुड़ाने के लिए लोग अक्सर बहुत जोर से रगड़ते हैं, तेज शैंपू का इस्तेमाल करते हैं या बार-बार बाल धोते हैं। इस तरह की रगड़ और बार-बार धुलाई से स्कैल्प की नेचुरल नमी खत्म हो जाती है, जिससे सूखापन, जलन और सूजन और बढ़ सकती है। ऐसे में रंग साफ करते समय ज्यादा जोर से रगड़ने से बचें।
Trending
- नेपाल में बाढ़ के बीच शर्मनाक हरकत, नदी में बहकर आया बैंक का सेफ तोड़कर निकाले लाखों रुपये; 29 गिरफ्तार
- महतारी वंदन बना रंभा बाई का सहारा, स्वास्थ्य जांच से लेकर आने-जाने तक की जरूरतें हो रहीं पूरी
- शनिवार बना सीखने-खेलने और सृजन का दिन, बैगलेस डे पर स्कूलों में दिखी नई रौनक
- बिलासपुर हिंसा पर भूपेश बघेल का सरकार पर हमला, बोले- ‘गृह मंत्रालय नहीं संभल रहा, अपना जिला भी नहीं’
- पीएम मोदी के जन्मदिन से भाजपा का ‘सेवा संकल्प अभियान: छत्तीसगढ़ में 17 सितंबर से 18 अक्टूबर तक चलेगा एक महीने का राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम
- आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ते कदम, स्वयं की मेहनत और सरकारी सहयोग से कमलेश यादव बनीं ‘लखपति दीदी’
- बिहान से बहनों को मिला आर्थिक संबल, खीरे की खेती से सुभद्रा मंडल ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी
- दुर्ग में रक्षाबंधन की खुशियां मातम में बदलीं: जंजगिरी रोड हादसे में 25 वर्षीय युवक की मौत, पत्नी और एक साल का बच्चा सुरक्षित


