खबर वर्ल्ड न्यूज़ – पंडरिया (कबीरधाम) चेक बाउंस के एक महत्वपूर्ण मामले में कबीरधाम जिले के पंडरिया न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को दोषसिद्ध करार दिया है। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के पंडरिया स्थित प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री आलोक अग्रवाल की अदालत ने अभियुक्त बलराम सेन उर्फ बल्ला पिता राघव राम सेन निवासी ग्राम गुंजेरा पोस्ट मारो जिला बेमेतरा को तीन माह साधारण कारावास एवं 180000/ अठारह लाख रुपये प्रतिकर राशि अदा करने की सजा सुनाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार परिवादी व्यास पाठक से अभियुक्त बलराम सेन ने लगभग 1800000/- अठारह लाख रुपए उधार लिए थे। उक्त राशि के भुगतान के लिए अभियुक्त द्वारा 1800000/- अठारह लाख रुपए का चेक परिवादी को प्रदान किए गए। जब परिवादी व्यास पाठक ने इन चेकों को अपने बैंक खाते में भुगतान हेतु प्रस्तुत किया, तो अभियुक्त के हस्ताक्षर का मिलान ना होने के कारण चेक बाउंस हो गया।
इसके पश्चात परिवादी द्वारा नियमानुसार अभियुक्त को कानूनी नोटिस भेजा गया, किंतु नोटिस प्राप्त होने के बाद भी अभियुक्त द्वारा न तो राशि का भुगतान किया गया और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया गया। विवश होकर परिवादी ने पंडरिया तहसील न्यायालय में मामला दर्ज कराया, जो प्रकरण क्रमांक 06/2020 के रूप में पंजीबद्ध हुआ। इस प्रकरण का
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्क, प्रस्तुत दस्तावेज एवं साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। सुनवाई पूर्ण होने के उपरांत दिनांक 05 /08/ 2026 को न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए अभियुक्त बलराम सेन को चेक अनादरण के प्रकरण में दोषसिद्ध पाया।
पंडरिया न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश आलोक अग्रवाल ने अपने फैसले के आदेश में अभियुक्त को 3माह साधारण कारावास की सजा सुनाई तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 के अंतर्गत परिवादी व्यास पाठक को कुल 18,00000/- अठारह लाख रुपये प्रतिकर राशि राशि का अदा करने का निर्देश दिया। साथ ही न्यायालय ने यह भी स्पष्ट आदेश दिया कि यदि अभियुक्त द्वारा प्रतिकर राशि की अदायगी नहीं की जाती है, तो ऐसी स्थिति में अभियुक्त को 10 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास पृथक से भोगना होगा। अभियुक्त की ओर से मुकेश सिंह ठाकुर परिवादी व्यास पाठक की ओर से अधिवक्ता विजय कुमार सोनड्रे ने की पैरवी।
इस निर्णय को चेक बाउंस मामलों में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि इस प्रकार के फैसले से आर्थिक लेन-देन में विश्वास बना रहेगा और जानबूझकर भुगतान से बचने वालों पर अंकुश लगेगा।


