खबर वर्ल्ड न्यूज-अंबिकापुर । छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम और कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने रामनवमी के अवसर पर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों की तुलना प्रभु श्रीराम द्वारा रावण वध से की। सिंहदेव ने कहा, “प्रभु श्रीराम ने रावण को पहले शांति का संदेश भेजा था, परंतु जब रावण नहीं माना, तब श्रीराम को शस्त्र उठाना पड़ा। ठीक वैसे ही सरकार ने भी नक्सलियों से पहले शांति की कोशिश की, पर जब वे नहीं माने, तो अब जवाब हथियार से दिया जा रहा है।
नक्सलवाद से शांति की कोशिशें और अब युद्ध जैसी कार्रवाई: सिंहदेव का संदर्भ
टीएस सिंहदेव का यह बयान सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि सरकार की नीति में बदलाव की ओर संकेत करता है। छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास, शिक्षा, रोजगार, और संवाद के ज़रिये मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिशें की थीं।
शांति की कोशिशें:
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2019–2022 के बीच सरकार ने लगभग 100 से ज्यादा सरेंडर को बढ़ावा दिया।
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“लोन वर्राटू” (घर लौटो) अभियान के तहत बस्तर में 600 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।
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राज्य सरकार ने लगभग 40 नई CRPF और STF कैम्प खोलने की बजाय स्कूल, अस्पताल, और सड़कें पहले बनाने की नीति अपनाई थी।
लेकिन अब… नक्सलियों के खिलाफ एक आक्रामक रुख:
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2023-24 में 50 से अधिक मुठभेड़ें दर्ज की गईं।
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बीजापुर, सुकमा, और दंतेवाड़ा में सुरक्षाबलों की ओर से कई बड़े ऑपरेशन किए गए।
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2024 में अप्रैल तक नक्सल विरोधी अभियान में 60 से अधिक नक्सली मारे गए, जिनमें कई बड़े इनामी कमांडर शामिल हैं।

