खबर वर्ल्ड न्यूज-सरगुजा – लखनपुर विकासखंड के ग्राम गुमगरा खुर्द बरती पारा में पदस्थ सहायक शिक्षक एलबी शैलेंद्र सिंह पोर्ते को बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार और शराब के नशे में स्कूल आने के आरोपों के तहत निलंबित कर दिया गया है। शिक्षक के इस अनुचित व्यवहार पर ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज की, जिसके बाद मामले की जांच की गई। जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
मामले का विवरण:
24 फरवरी 2025 को सहायक शिक्षक एलबी शैलेंद्र सिंह पोर्ते पर आरोप लगा कि वह शराब का सेवन कर स्कूल पहुंचे थे और बच्चों के साथ बेरहमी से मारपीट की थी। इस घटना की सूचना पर संकुल समन्वयक विनोद गुप्ता जांच हेतु स्कूल पहुंचे। जांच के दौरान पाया गया कि शिक्षक नशे की हालत में थे और उन्होंने बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार किया।
शिकायत और जांच:
ग्राम गुमगरा खुर्द बरती पारा के ग्रामीणों ने शिक्षक के खिलाफ बार-बार शराब के नशे में स्कूल आने और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। इस पर संकुल समन्वयक ने मौके पर जाकर जांच की। जांच रिपोर्ट में शिक्षक को शराब के नशे में पाया गया और यह भी प्रमाणित हुआ कि उन्होंने बच्चों के साथ मारपीट की थी।
निलंबन की कार्रवाई:
जांच रिपोर्ट के आधार पर, शिक्षक एलबी शैलेंद्र सिंह पोर्ते को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के उल्लंघन का दोषी पाया गया। इस पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम 1966 के नियम 9 के तहत उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय उदयपुर नियत किया गया है।
निलंबन के दौरान शिक्षक को जीवन निर्वहन भत्ते की पात्रता दी जाएगी।
आंकड़े और पृष्ठभूमि:
हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में शिक्षकों द्वारा अनुचित व्यवहार के मामले सामने आए हैं, जिसमें स्कूलों में अनुशासनहीनता और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं बढ़ी हैं। 2024-25 में, सरगुजा जिले में ही ऐसी पांच घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं, जिसमें नशे की हालत में स्कूल आने और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं। सरकार ने इन घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखने और उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
सरगुजा जिले के शिक्षा अधिकारियों ने ऐसे मामलों में सख्ती दिखाते हुए निलंबन और कार्रवाई के कदम उठाए हैं, ताकि छात्रों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार बर्दाश्त न किया जाए और शिक्षा का माहौल सुरक्षित बना रहे।
निष्कर्ष:
शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन और नैतिकता का पालन करना अत्यंत आवश्यक है, और शिक्षकों से अपेक्षा की जाती है कि वे छात्रों के प्रति जिम्मेदारी से पेश आएं। इस मामले में शिक्षक के खिलाफ की गई कार्रवाई अन्य शिक्षकों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा के प्रति कोई भी गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार अस्वीकार्य है।

