खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान सदैव पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और मनमोहक दृश्यों के लिए पूरे भारत में अपनी अलग पहचान रखता है। अब कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के अंदर जलजीव के सरंक्षण के लिए शासन द्वारा एक नया कदम उठाया जा रहा है। जिसमे कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के अंदर मगरमच्छों की गिनती की जाएगी। यह गिनती दिल्ली के विशेषज्ञों द्वारा किया जायेगा।
मिली जानकरी के अनुसार राष्ट्रीय उद्यान में 15 बड़े एवं 40 बच्चे मगरमच्छ मिले हैं। इंद्रावती नदी एवं विभिन्न नालों में
मिलने वाले मगरमच्छ को कांगेर नदी में लाकर छोड़ा जा रहा है। आमतौर पर हमने और आपने देखा है, कि उद्यानों में टाइगर रिजर्व, और अन्य जंगली जीवों और पक्षियों को सरंक्षण के लिए कई तरह के अभियान चलाए जाते हैं। लेकिन जलजीवों पर उस स्तर पर कार्य नजर नहीं आते। कांगेर घाटी राष्ट्रिय उद्यान में यह पहली बार हो रहा है कि मगरमच्छों की गणना की जा रही है।
उल्ल्ेखनिय है कि बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 1982 में स्थापित किया गया था। यह 200 वर्ग
किलोमीटर क्षेत्र में विस्तारित राष्ट्रीय उद्यान है। यहां की 15 से अधिक सुंदर लाइमस्टोन की गुफाएं, तीरथगढ़,
कांगेर धारा जलप्रपात, दुर्लभ वन्यजीव जैसे उदबिलाव, माउस डियर, जॉइंट सक्वरल, लेथिस सॉ टशेल टर्टल,
जंगली भेडिय़ा के साथ-साथ 200 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां, वनस्पतियों की 900 से अधिक प्रजातियों और तितलियों की 140 से अधिक प्रजातियों के लिए याति प्राप्त है। उद्यान में पर्यटकों की सं या लगातार बढ़ रही है।

