Khabarworld24 -केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना वय वंदना योजना (Vay Vandana Yojana) बुजुर्गों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में शुरू की गई थी, लेकिन आंकड़े यह दर्शाते हैं कि इस योजना में बुजुर्गों की दिलचस्पी अपेक्षाकृत कम रही है। 2023-2024 में छत्तीसगढ़ राज्य में इस योजना के तहत 10,000 से भी कम बुजुर्गों ने पंजीकरण कराया है, जो कि सरकार की अपेक्षाओं से काफी कम है।
वय वंदना योजना: एक अवलोकन
यह योजना उन बुजुर्ग नागरिकों के लिए है, जो अपनी पेंशन और अन्य आय के साधनों से आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। इस योजना के तहत पेंशन का भुगतान हर माह किया जाता है और सरकार ने इसे बुजुर्गों की जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए लॉन्च किया था। आयुष्मान भारत योजना की तरह इसका लक्ष्य गरीब और असहाय बुजुर्गों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, लेकिन पंजीकरण की गति संतोषजनक नहीं रही।
आंकड़े: पंजीकरण में कमी
वर्तमान में राज्य में केवल 9,800 बुजुर्गों ने इस योजना के तहत पंजीकरण कराया है, जो कि 2024 में योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य 50,000 से काफी कम है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय हो रही है। योजना के प्रचार-प्रसार के बावजूद, सरकार को पंजीकरण में उछाल देखने को नहीं मिल रहा है।
बुजुर्गों की कम दिलचस्पी: कारण क्या हैं?
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जानकारी की कमी: कई बुजुर्गों को इस योजना के लाभ और प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी नहीं है। ग्रामीण इलाकों में सूचना का अभाव इस समस्या को और बढ़ा देता है।
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आर्थिक स्थिति: कुछ बुजुर्गों का मानना है कि योजना के तहत मिलने वाली पेंशन राशि उनके जीवनस्तर को सुधारने के लिए पर्याप्त नहीं है, इसलिए वे इस योजना में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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इंटरनेट की उपलब्धता और तकनीकी बाधाएं: खासकर बुजुर्गों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया जटिल हो सकती है, और ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की उपलब्धता भी सीमित है। इससे भी योजना में भागीदारी कम हो रही है।
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आयुष्मान योजना का प्रभाव: आयुष्मान योजना में भी इसी तरह की समस्या देखने को मिली थी, जिसमें कई लाभार्थियों ने योजना के फायदे को पूरी तरह से समझा नहीं था। वय वंदना योजना में भी कुछ ऐसी ही स्थिति बन रही है।
सरकारी प्रयास
राज्य सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत जिला स्तर पर प्रशिक्षण सत्र और कैम्प आयोजित किए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक बुजुर्ग इस योजना का लाभ उठा सकें।
आगे की राह
हालांकि पंजीकरण में कमियां देखने को मिल रही हैं, फिर भी इस योजना को सही तरीके से लागू करने और प्रचारित करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों को मिलकर इस योजना के प्रति बुजुर्गों में जागरूकता बढ़ानी होगी ताकि वे इससे जुड़े और इसका अधिकतम लाभ उठा सकें।
निष्कर्ष
वय वंदना योजना के तहत पंजीकरण की धीमी गति चिंताजनक है, लेकिन इसे सुधारने के लिए सरकार की पहल सकारात्मक हो सकती है। यदि समय रहते इस योजना को सही तरीके से लागू किया जाए तो यह बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर-बालकृष्ण साहू

