Khabarworld24 -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जम्मू-कश्मीर में 6.5 किलोमीटर लंबी सोनमर्ग सुरंग का उद्घाटन करेंगे। यह सुरंग गगनगीर से सोनमर्ग तक जाती है, जो सोनमर्ग के खूबसूरत पर्यटन स्थल को सालभर सड़क संपर्क से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इस उद्घाटन का समय सुबह 11:45 बजे निर्धारित है। प्रधानमंत्री मोदी इसके बाद एक जनसभा को संबोधित करेंगे और सुरंग निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों से भी मुलाकात करेंगे।
परियोजना की महत्वपूर्ण विशेषताएं
सोनमर्ग सुरंग को “जेड मोड़ सुरंग” के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम सुरंग के जिस स्थान पर बनाई गई है, वहां की सड़क के अंग्रेजी के ‘Z’ अक्षर की तरह घुमावदार होने के कारण दिया गया है। समुद्र तल से 8,650 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह सुरंग अत्यधिक चुनौतीपूर्ण भूगर्भीय परिस्थितियों में बनाई गई है। बर्फ से ढंकी इन पहाड़ियों के बीच सुरंग का निर्माण कठिनाई भरा था, लेकिन यह 2,700 करोड़ रुपये की लागत से सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। सुरंग के निर्माण के बाद, अब श्रीनगर और सोनमर्ग के बीच सालभर सुगम यात्रा संभव होगी।
सोनमर्ग और पर्यटन पर प्रभाव
बर्फबारी के चलते सोनमर्ग का रास्ता अभी हर साल लगभग 4 महीने तक बंद रहता था, लेकिन इस सुरंग के खुलने से पर्यटकों को हर मौसम में सोनमर्ग की सुंदरता का आनंद लेने का मौका मिलेगा। सोनमर्ग, जो अपने प्राकृतिक दृश्य और ट्रेकिंग के लिए प्रसिद्ध है, कश्मीर में पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र है। नए संपर्क से क्षेत्र में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में सुधार आएगा।
सुरंग के तकनीकी पहलू और सुरक्षा
सुरंग को अत्याधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है और इसमें सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसमें आपातकालीन निकासी मार्ग, वेंटिलेशन सिस्टम, अग्निशमन प्रणाली, और अत्याधुनिक सीसीटीवी निगरानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सुरंग की लंबाई 6.5 किलोमीटर है और यह श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर एक प्रमुख अवरोध को दूर करती है।
आर्थिक दृष्टिकोण
इस सुरंग का निर्माण 2,700 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है, जो जम्मू-कश्मीर के आर्थिक विकास के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस परियोजना से न केवल परिवहन सुगम होगा, बल्कि राज्य के पर्यटन, व्यापार और स्थानीय व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, इस सुरंग से सेना की आवाजाही में भी आसानी होगी, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इसरो की भूमिका और तकनीकी योगदान
सुरंग निर्माण की इस प्रक्रिया में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसरो द्वारा उपग्रह आधारित भू-स्थानिक आंकड़ों और तकनीकी सहायता से परियोजना के डिजाइन और भूगर्भीय अध्ययन किए गए, जिससे निर्माण कार्य में सुधार और तेजी आई। ISRO द्वारा दी गई भू-स्थानिक जानकारी का उपयोग सुरंग की सटीक योजना बनाने और बर्फबारी व भू-स्खलन से होने वाले खतरों को कम करने के लिए किया गया है। इस प्रकार, इसरो का तकनीकी योगदान परियोजना की सफलता में महत्वपूर्ण रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी का बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह सुरंग न केवल कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता को देखने के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाजनक होगी, बल्कि यहां के निवासियों के जीवन में भी सुधार करेगी। इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा।”
इस सुरंग के उद्घाटन के साथ जम्मू-कश्मीर में साल भर पर्यटन की संभावनाओं का विस्तार होगा, जिससे स्थानीय उद्योगों को लाभ होगा और यह राज्य के लिए विकास की एक नई दिशा प्रदान करेगा।
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आंकड़े:
- परियोजना लागत: ₹2,700 करोड़
- सुरंग की लंबाई: 6.5 किलोमीटर
- ऊंचाई: 8,650 फीट
- बर्फबारी के कारण बंद रहने की अवधि: 4 महीने
खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर-बालकृष्ण साहू

