Khabarworld24.com -केंद्र सरकार के साथ 14 फरवरी को प्रस्तावित बैठक के बाद किसानों और सरकार के बीच गतिरोध को हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रविवार को पंजाब के 111 और हरियाणा के 10 किसानों ने अपना मरणव्रत समाप्त कर दिया, जो पांच दिन और तीन दिन से क्रमशः अनशन पर थे। यह निर्णय किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के मेडिकल ट्रीटमेंट लेने की सहमति के बाद लिया गया। खनौरी बॉर्डर पर डल्लेवाल कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे और उनकी तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ी।
मुख्य बिंदु:
- किसानों की मरणव्रत समाप्ति: किसान नेता काका सिंह कोटड़ा, सुखजीत सिंह हरदोझंडे, और बलदेव सिंह सिरसा ने पंजाब और हरियाणा के अनशनरत किसानों को जूस पिलाकर उनका मरणव्रत समाप्त करवाया।
- केंद्र के साथ वार्ता: केंद्र सरकार के साथ 14 फरवरी को वार्ता का प्रस्ताव मिलने के बाद यह कदम उठाया गया। वार्ता में किसानों की मुख्य मांगें जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी, कृषि कानूनों की समीक्षा, और अन्य संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
- किसान नेताओं का बयान: किसान नेता काका सिंह कोटड़ा ने इसे “जीत की तरफ पहला कदम” बताते हुए कहा कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है और जब तक किसानों की मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
अनशन की स्थिति और कारण:
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में 121 किसान केंद्र सरकार द्वारा लंबित मांगों को लेकर अनशन पर बैठे थे। उनकी मांगों में मुख्य रूप से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और सरकार की तरफ से लंबित वादों को पूरा करने की मांग शामिल थी। किसानों का कहना है कि उनकी मांगें तब तक पूरी नहीं हुईं जब तक MSP की कानूनी सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती और किसानों के हितों को संरक्षित नहीं किया जाता।
आँकड़े:
- किसानों की संख्या: पंजाब के 111 और हरियाणा के 10 किसानों ने अनशन समाप्त किया।
- मरणव्रत की अवधि: पंजाब के किसानों का अनशन पांच दिनों तक चला, जबकि हरियाणा के किसानों ने तीन दिनों तक भूख हड़ताल की।
- अगली बैठक: 14 फरवरी, 2025 को केंद्र और किसान नेताओं के बीच बातचीत निर्धारित है।
भविष्य की योजना:
किसान नेता काका सिंह कोटड़ा ने घोषणा की है कि आंदोलन अब भी जारी रहेगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह अनशन का समाप्त होना सिर्फ एक अस्थायी राहत है, और यदि वार्ता में उनकी मांगों का उचित समाधान नहीं होता है, तो आंदोलन फिर से तेज होगा। किसानों का कहना है कि जब तक MSP की कानूनी गारंटी और अन्य लंबित मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।
आंदोलन का प्रभाव:
इस आंदोलन ने किसानों के लिए एकजुटता और सामूहिक संघर्ष का संदेश दिया है। हजारों किसान केंद्र सरकार के साथ लंबे समय से मांगें पूरी करने के लिए संघर्षरत हैं। हालिया घटनाओं ने केंद्र और किसानों के बीच संवाद को नई दिशा दी है, और 14 फरवरी को होने वाली बैठक से उम्मीदें बढ़ गई हैं कि इस वार्ता से ठोस समाधान निकलेगा।
निष्कर्ष: 121 किसानों का अनशन समाप्त होना और 14 फरवरी को केंद्र के साथ वार्ता की दिशा में बढ़ना एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। हालांकि, आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है, और किसान तब तक संघर्षरत रहेंगे जब तक उनकी मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं होता।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

