खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन का खाका तैयार कर लिया है। दिल्ली बैठक से लौटने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (पीसीसी चीफ) दीपक बैज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ चरणबद्ध विरोध प्रदर्शनों का ऐलान किया।
दीपक बैज ने बताया कि राहुल गांधी और शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व के निर्देशों के तहत SIR (विशेष आलेख/रिपोर्टिंग प्रक्रिया) और ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग व सत्तारूढ़ दल को बेनकाब किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, कथित घोटालों और मंत्रियों से जुड़े भूमि विवादों पर राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया।
1. कांग्रेस के देशव्यापी व राज्यव्यापी आंदोलन की समय-सारणी
कांग्रेस ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार को घेरने के लिए 4 प्रमुख चरणों में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है:
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चरण 1 (10 अक्टूबर से 20 अक्टूबर): पूरे छत्तीसगढ़ में जिला व ब्लॉक स्तर पर विरोध मार्च और विशाल बाइक रैलियों का आयोजन।
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चरण 2 (इसी अवधि में): मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और ‘वोट चोरी’ के विरोध में उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) कार्यालयों का घेराव।
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चरण 3 (25 अक्टूबर से प्रारंभ): राज्य के सभी ग्रामीण इलाकों और पंचायतों में ‘चौपाल’ कार्यक्रमों का आयोजन, जहां ग्रामीणों को वोटिंग प्रक्रिया की कथित कमियों और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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चरण 4 (नवंबर माह): प्रदेशव्यापी ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महाअभियान का संचालन।
2. बालोद एसिड अटैक पर गृहमंत्री से इस्तीफे की मांग
बालोद जिले में हाल ही में हुए एसिड अटैक मामले पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए दीपक बैज ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए:
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सुरक्षा पर सवाल: बैज ने कहा, “ऐसी खौफनाक घटनाएं पहले दिल्ली जैसे महानगरों में सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब छत्तीसगढ़ की दुर्दशा यह हो चुकी है कि पुलिसकर्मी की बेटियां तक सुरक्षित नहीं हैं। जब पुलिस अपनी ही बेटियों की रक्षा नहीं कर पा रही, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे होगी?”
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गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग: उन्होंने कहा कि गृह विभाग संभालने में वर्तमान गृहमंत्री पूरी तरह विफल साबित हुए हैं, इसलिए उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत पद छोड़ देना चाहिए।
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अपराध का गढ़: कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा के शासनकाल में छत्तीसगढ़ ‘अपराध का गढ़’ बन चुका है।
3. प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत का 3-दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा
कांग्रेस के नव-नियुक्त छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत का 3 दिवसीय तूफानी दौरा आज से शुरू हो रहा है:
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पहला दिन (रायपुर): सुखदेव भगत का रायपुर आगमन और वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रारंभिक चर्चा।
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दूसरा दिन (बस्तर व कांकेर): सुबह 10 बजे रायपुर से बस्तर के लिए प्रस्थान। कांकेर जिला मुख्यालय में आयोजित ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ जन-रैली का नेतृत्व।
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तीसरा दिन (दंतेवाड़ा व जगदलपुर): मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन-पूजन के पश्चात दंतेवाड़ा और जगदलपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें।
पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर द्वारा सुखदेव भगत के दौरे पर किए गए तंज का जवाब देते हुए बैज ने पलटवार किया: “झारखंड में गठबंधन की स्थिर और सफल सरकार चल रही है। अजय चंद्राकर पहले यह बताएं कि छत्तीसगढ़ में सरकार और मंत्रियों का क्या हाल है? राज्य में हर विभाग में लूट और भ्रष्टाचार चरम पर है।”
4. घोटालों, बैलेट पेपर और भाजपा के अंदरूनी कलह पर सीधे वार
दीपक बैज ने पत्रकार वार्ता के दौरान राज्य के कई अन्य ज्वलंत राजनीतिक मुद्दों पर आंकड़े और तर्क सामने रखे:
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घोटालों की जांच पर तंज: कोल घोटाला, शराब घोटाला और महादेव सट्टा ऐप मामले में पेश हो रही पूरक चार्जशीट पर उन्होंने कहा कि यह केवल कागजी जांच का नाटक है। यदि निष्पक्षता चाहिए, तो एनआईए (NIA) या अन्य केंद्रीय एजेंसियां ठोस कार्रवाई करके दिखाए, न कि केवल राजनीतिक प्रतिशोध के तहत चार्जशीट दाखिल करें।
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बैलेट पेपर से चुनाव की मांग: लोकतांत्रिक पारदर्शिता की वकालत करते हुए बैज ने मांग की कि आगामी निकाय चुनावों में से कम से कम 15 निकायों में चुनाव बैलेट पेपर (मतपत्र) से कराए जाएं।
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मंत्री केदार कश्यप पर ’20-20′ का तंज: भूमि विवाद मामले में मंत्री केदार कश्यप पर हमला बोलते हुए बैज ने कहा, “केदार कश्यप पिछले 8 दिनों से मौन हैं। उन्हें जनता को बताना चाहिए कि ₹20 लाख की जमीन को ₹20 करोड़ में बेचने का जादुई फॉर्मूला उनके पास कहां से आया?”
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भाजपा में ‘सिर-फुटव्वल’ और ट्रांसफर विवाद: कांग्रेस में गुटबाजी के भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए बैज ने कहा कि कांग्रेस एकजुट है, जबकि असली ‘सिर-फुटव्वल’ भाजपा के अंदर चल रहा है। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता पवन साय के अचानक हुए स्थानांतरण को चुनावी चंदे और अंदरूनी खींचतान का नतीजा करार दिया।


