खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जेसीसी-जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी का नया गीत ‘कौआ सॉन्ग’—“जागो रे बघुआ छत्तीसगढ़ के, कोलिहा मन ललकारत हे” रिलीज होते ही प्रदेश के राजनीतिक और डिजिटल गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से ट्रेंड हो रहे इस गीत के जरिए अमित जोगी ने सीधे तौर पर राज्य के संसाधनों, क्षेत्रीय स्वाभिमान और कॉरपोरेट दखल को निशाना बनाया है।
फेसबुक पोस्ट से छेड़ा राजनीतिक समर
अमित जोगी ने इस विवादित और आक्रामक गीत को अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर साझा करते हुए लिखा:
“हमर मंदिर, हमर देवता, हमर माटी। जब छत म कौवा बैठ जाथे अउ ख़ुद ल हमर देवता ले बड़े समझथे तब गाना नहीं- ललकार निकलथे। जय छत्तीसगढ़ महतारी!”
गीत के प्रमुख बोल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर और औद्योगिक समूहों के प्रभाव के बीच चल रहे द्वंद्व को रेखांकित करते हैं:
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“मंदिर छत म कौवा बैठे, देवता ले बड़े बाजत हे…”
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“मंदिर के छत म अड़ानी बैठे, देवता ले बड़े बाजत हे…”
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“जागो रे बघुआ छत्तीसगढ़ के, कोलिहा मन ललकारत हे… जागो रे बघुआ, माटी दाई पुकारत हे!”
सोशल मीडिया पर आंकड़ों की जुबानी ‘कौआ सॉन्ग’ का प्रभाव
गीत के जारी होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर इसके डिजिटल आंकड़ों ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में इसके प्रभाव को साबित किया है:
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व्यूज और रीच (Reach): रिलीज होने के 6 घंटे के भीतर इस ट्रैक ने विभिन्न प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम) को मिलाकर 50,000 से अधिक व्यूज हासिल कर लिए।
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सोशल शेयरिंग: फेसबुक पर इस पोस्ट को 1,200 से अधिक बार शेयर किया जा चुका है और इस पर 3,500 से अधिक प्रतिक्रियाएं (Reactions) दर्ज की गई हैं।
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कमेंट और ट्रेंड: वीडियो पर 800 से अधिक टिप्पणियां आई हैं, जिनमें से लगभग 75% प्रतिक्रियाएं स्थानीय युवाओं और क्षेत्रीय समर्थकों की ओर से छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान के पक्ष में दर्ज की गई हैं।
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डिजिटल ट्रेंडिंग: व्हाट्सएप ग्रुप्स और रील्स (Reels) में इसके ऑडियो क्लिप्स को स्थानीय स्तर पर तेजी से शेयर किया जा रहा है।


