रथ के निर्माण के औजारों की पूजा कहलाता है, पाट जात्रा पूजा विधान, पूजित पहली लकड़ी से विशालकाय हथौड़ा बनाया जायेगा
खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर सिंहद्वार के सामने आज बुधवार को हरेली अमावस्या के अवसर पर पाट जात्रा पूजा विधान में अंडा, मोंगरी मछली व बकरे की बलि की रियासत कालीन परंपरा के निर्वहन के साथ विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक ‘बस्तर दशहरा पर्व’ का विधिवत शुभारंभ हो गया है। 75 दिनों तक चलने वाले इस अनोखे और अलौकिक उत्सव की शुरुआत के साथ ही रथ निर्माण के लिए लाई गई पहली लकड़ी ठुरलू खोटला की पूजा अर्चना विधि विधान के साथ की गई। इस दाैरान महापौर संजय पाण्डे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, कांग्रेस के पूर्व विधायक रेखचंद जैन, कलेक्टर आकाश छिकारा, अपर कलेक्टर सीपी. बघेल, बस्तर दशहरा समिति के सदस्य, पारम्परिक मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक और बड़ी संख्या में सेवादार उपस्थित रहे।
उल्लेखनिय है कि दशहरा बस्तर की आराध्य मां दंतेश्वरी के पूजा अनुष्ठान का पर्व बस्तर दशहरा की शुरुआत हरेली अमावस्या से होती है। इसमें बिलोरी के जंगल से लाई गई लकड़ी जिसकी पूजा की परंपरा पाट जात्रा पूजा विधान कहलाती है। वस्तुत:पाटजात्रा पूजा विधान बस्तर दशहरा में बनाये जाने वाले दुमंजिला विशाल रथ के निर्माण में उपयोग की जाने वाले परंपरागत औजारों की पूजा है। इसमें जिस लकड़ी की पूजा की जाती है, उसे स्थानिय बोली में ठुरलू खोटला कहा जाता है, इस लकड़ी से विशालकाय हथौड़ा बनाया जायेगा, जिसका उपयोग बस्त रदशहरा के दुमंजिला विशाल रथ के पहिए के निर्माण के दौरान हथौड़े के रूप में किया जाता है। इस लकड़ी के साथ ही अन्य परंपरागत रथ निर्माण के औजारों की भी परंपरानुसार पूजा रथ निर्माण करने वाले सिद्धहस्त कारीगराें के द्वारा की जाती है, पूजा विधान में अन्य पूजा सामग्रीयों के अलावे विशेष रूप से अंडा, मोंगरी मछली व बकरे की बलि दिये जाने की रियासत कालीन परंपरा कानिर्वहन किया गया।


