खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के नरहरपुर वन परिक्षेत्र अंर्तगत लारगांव मरकाटोला गांव में आज बुधवार दोपहर काे वन्य प्राणी भालू के भीषण हमले में भाई और बहन की दर्दनाक मौत हो गई, मादा भालू हमले के बाद मृतकाे के शवों को नोचता रहा, जिसका वीडियो भी सामने आया है। इस हमले में 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं दूसरी घटना में वन्य प्राणी भालू के हमले से महिला ने दम तोड़ दिया। यह घटना भी नरहरपुर वन परिक्षेत्र के गवरसिल्ली गांव की है। भालू के हमले से तीनाें मरने वालों की पहचान हलाल जुर्री, चमरीन जुर्री एवं खोरीन बाई के रूप में हुई है।
नरहरपुर वन परिक्षेत्र में भालू गांव के आस-पास ही मौजूद है। जिससे ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर भालू की निगरानी कर रही है। इसके साथ ही ग्रामीणों को भालू से दूर रहने की अपील की गई है। इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि यह हादसा टाला जा सकता था। जंगल में एक मृत भालू के पास जब मादा भालू की मौजूदगी देखी गई, तो सतर्क ग्रामीणों ने इसका वीडियो बना लिया था। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इस खतरे की जानकारी भी सार्वजनिक कर दी थी। स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि समय रहते वन विभाग ने न तो इलाके की कोई घेराबंदी की और न ही आम जनता को वहां जाने से रोकने के लिए कोई सुरक्षा प्रबंध किए। इसी प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी के कारण तीन ग्रामीण अनजाने में वन्य प्राणी भालू के हमले का शिकार बन गए।
कांकेर जिले के लिए भालू का यह आतंक कोई नया विषय नहीं है। वन क्षेत्रों से जुड़े गांवों में पिछले कई वर्षों से भालू के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। प्रति वर्ष दर्जनों ग्रामीण इन हमलों में घायल होते हैं, और कई बेकसूर अपनी जान गंवा बैठते हैं।वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में लगातार बढ़ता मानवीय दखल, प्राकृतिक आवासों का सिमटना और भोजन की कमी इस बढ़ते संघर्ष का मुख्य कारण हैं। ऐसी दुर्घटनाओं से बचने और खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद आवश्यक है। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय घने जंगलों या संवेदनशील क्षेत्रों में अकेले जाने से पूरी तरह परहेज करें। यदि जंगल में किसी मृत जानवर या वन्यजीव (विशेषकर मादा भालू और उसके शावकों) की मौजूदगी की सूचना मिले, तो उस तरफ भूलकर भी न जाएं। किसी भी खतरे या वन्यजीव की गतिविधि की जानकारी मिलते ही तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें। वन विभाग द्वारा जारी किए गए सुरक्षा अलर्ट और निर्देशों का हमेशा गंभीरता से पालन करें।
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