खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। वर्ष भर सुरक्षित स्थान में छुपकर रहने वाला वाटरकाक पक्षी जिसे बस्तर की स्थानीय बोली में कपकपिया कहते हैं नजर आने लगे हैं। वाटरकाक का वैज्ञानिक नाम गेलिक्रैक्र्स सिनेरिया है। यह पक्षी गेलिक्रैक्र्स वंश का इकलौता सदस्य है। पक्षी प्रेमी इसकी तस्वीर लेने के लिए साल भर का इंतजार करते हैं। बरसात के प्रारंभ से ही यह खेतों में दिखते हैं लेकिन इन्हें देख पाना इसलिए दुर्लभ है क्योंकि यह बड़े छुपे रुस्तम होते हैं। इसे दुर्लभ माना जाने लगा है कि क्योंकि इनकी संंख्या कम हो रही है।
प्रजनन काल में कपकपिया पक्षी पानी का बोतल उलट करके खाली करने जैसी आवाज निकालते हैं। शासकीय केपीजी कालेज धरमपुरा के प्राणी विज्ञान के प्रोफेसर सुशील दत्ता बीते 35 सालों से पक्षियों पर अध्ययन कर रहे हैं। दो दिन पहले दलपत सागर के समीप खेत में उन्होंने इसकी तस्वीर मोबाइल पर कैद की। उन्होंने बताया कि यह बहुत ही एकांत प्रिय पक्षी है। कभी-कभी यह खुले में दिखते हैं। धान के खेत में घास के बीच में यह अपना भोजन तलाशते हैं। इनका मुख्य भोजन कीड़े, छोटे घोंघे और छोटे मेंढक होते हैं। प्रजनन काल के बाद यह घने घास के बीच में सुरक्षित स्थान में छुप जाते हैं और वर्ष भर दिखाई नहीं पड़ते।
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- बस्तर के खेतों में दिखा वर्ष भर सुरक्षित स्थान में छुपकर रहने वाला दुर्लभ ‘कपकपिया’ (वाटरकॉक)


