khabarworld24.com – भारत में कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों ने खेती के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। विशेष रूप से युवा किसान अब परंपरागत फसलों, जैसे कि धान की खेती, से दूर होते जा रहे हैं और विदेशी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसमें प्रमुख कारण नई तकनीक, बदलती आर्थिक परिस्थितियाँ, और बेहतर मुनाफे की संभावनाएं हैं। इस बदलाव का असर विशेष रूप से छत्तीसगढ़ और अन्य धान उत्पादन वाले राज्यों में दिखाई दे रहा है, जहाँ युवाओं का धान की खेती से हटकर विदेशी फसलों जैसे ड्रैगन फ्रूट, क्विनोआ, एवोकाडो, और ब्लूबेरी की खेती की ओर रुझान बढ़ रहा है।
युवाओं का धान की खेती से किनारा
धान की खेती में पारंपरिक रूप से बहुत अधिक पानी, श्रम और समय की आवश्यकता होती है, जबकि इसकी आर्थिक संभावनाएँ सीमित हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान की खेती में मुनाफे की कमी और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियाँ भी इस बदलाव के पीछे प्रमुख कारण हैं। युवाओं ने महसूस किया कि धान के मुकाबले अन्य फसलों में ज्यादा मुनाफा और कम समय में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
विदेशी फसलों की ओर बढ़ता रुझान
नई तकनीक और कृषि विज्ञान की मदद से किसान अब ऐसी विदेशी फसलें उगा रहे हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ रही है। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में ड्रैगन फ्रूट, क्विनोआ, एवोकाडो जैसी फसलें तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
प्रमुख कारण:
- जलवायु अनुकूलन: इन फसलों की खेती कम पानी और बेहतर तकनीकी मदद से की जा सकती है।
- उच्च बाजार मूल्य: अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन फसलों की कीमतें धान की तुलना में काफी अधिक हैं।
- रोजगार और मुनाफे के बेहतर अवसर: विदेशी फसलों में उच्च उत्पादकता और कम जोखिम के कारण युवाओं को अधिक मुनाफे के अवसर मिल रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार:
- 2023 के अंत तक छत्तीसगढ़ में लगभग 25% युवा किसान धान की खेती छोड़कर विदेशी फसलों की खेती की ओर अग्रसर हुए हैं।
- पिछले 5 वर्षों में छत्तीसगढ़ में धान उत्पादन में 10% की गिरावट आई है, जबकि विदेशी फसलों की खेती का क्षेत्रफल 35% तक बढ़ा है।
- कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट की खेती में पिछले साल 20% वृद्धि हुई है, जबकि क्विनोआ की खेती में 15% वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकारी योजनाओं और तकनीकी सहयोग
सरकार और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा नई तकनीक और ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग, ग्रीनहाउस खेती जैसे तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार की विभिन्न योजनाओं, जैसे कि कृषि निर्यात योजना, के तहत विदेशी फसलों की खेती को समर्थन मिल रहा है।
निष्कर्ष:
कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और सरकारी सहयोग के कारण युवा किसान अब परंपरागत धान की खेती से हटकर नई और अधिक मुनाफे वाली विदेशी फसलों की ओर रुझान दिखा रहे हैं। इससे न केवल किसानों की आय में सुधार हो रहा है, बल्कि कृषि क्षेत्र को एक नई दिशा भी मिल रही है। अगर यह प्रवृत्ति इसी तरह जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखा जा सकता है।
संक्षिप्त बिंदु:
- नई तकनीक ने धान की खेती की जगह विदेशी फसलों की खेती को दिया बढ़ावा।
- युवाओं का मुनाफे और आधुनिक तरीकों की वजह से धान से किनारा।
- आंकड़े: 5 वर्षों में 10% की गिरावट धान उत्पादन में, विदेशी फसलों में 35% की वृद्धि।
खबर वर्ल्ड24-व्यास पाठक -छत्तीसगढ़

