खबर वर्ल्ड24-व्यास पाठक -छत्तीसगढ़ – 2018 से 2024 तक छत्तीसगढ़ में शराब नीति में कई बदलाव हुए। मुख्य रूप से यह नीति सरकारी नियंत्रण पर आधारित रही। 2017 में छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में शराब की बिक्री का पूर्ण नियंत्रण अपने हाथ में लिया, जिसके तहत सरकारी दुकानों के माध्यम से शराब का विक्रय शुरू हुआ। इसका उद्देश्य शराब की खपत पर नियंत्रण रखना और अवैध शराब बिक्री को रोकना था।
शराब नीति (2018-2024):
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सरकारी नियंत्रण:
- शराब की बिक्री पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा संचालित दुकानों से की गई।
- यह व्यवस्था “छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड” के तहत लागू की गई।
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शराबबंदी पर चर्चा:
- शराबबंदी को लेकर लगातार राजनीतिक बहस रही, खासकर 2018 में जब कांग्रेस सत्ता में आई।
- कांग्रेस ने चुनावी वादे में पूर्ण शराबबंदी का ऐलान किया था, लेकिन इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया।
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राजस्व पर ध्यान:
- शराब से अर्जित राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है, इसलिए सरकार ने इसे पूरी तरह से बंद करने के बजाय नियंत्रित बिक्री पर जोर दिया।
राजस्व आंकड़े (2018-2024):
- 2018-19: लगभग ₹4,500 करोड़
- 2019-20: लगभग ₹5,000 करोड़
- 2020-21: COVID-19 महामारी के कारण गिरावट आई, फिर भी लगभग ₹4,000 करोड़ अर्जित हुआ।
- 2021-22: लगभग ₹5,500 करोड़
- 2022-23: लगभग ₹6,000 करोड़
- 2023-24: लगभग ₹6,500 करोड़ (अनुमानित)
सरकार की नीति का उद्देश्य:
- अवैध शराब बिक्री को नियंत्रित करना।
- राज्य के खजाने में स्थिर राजस्व सुनिश्चित करना।
- शराबबंदी लागू करने के लिए चरणबद्ध तरीके से योजना बनाना।
हालांकि, शराब नीति को लेकर सामाजिक संगठनों और विपक्ष ने बार-बार सवाल उठाए, विशेषकर महिलाओं और आदिवासी क्षेत्रों में।
छत्तीसगढ़ में 2024 की नई शराब नीति, राज्य के राजस्व और पारदर्शिता बढ़ाने पर केंद्रित है। इस नीति को जनवरी 2024 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंजूरी दी गई।
नई शराब नीति के मुख्य बिंदु:
छत्तीसगढ़ राज्य की शराब नीति (Liquor Policy) का मुख्य उद्देश्य राज्य के राजस्व में वृद्धि करना और शराब की बिक्री को नियंत्रित तरीके से संचालित करना है। राज्य सरकार ने अपनी शराब नीति के तहत साल 2024-25 के लिए 11,000 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है, जो राज्य के वित्तीय ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आइए, छत्तीसगढ़ की शराब नीति के प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से नजर डालते हैं:
1. सरकारी नियंत्रण और संचालन
छत्तीसगढ़ सरकार ने 2017 में शराब की बिक्री और वितरण को अपने नियंत्रण में ले लिया था। इसके तहत राज्य में शराब की दुकानें सरकारी तौर पर संचालित होती हैं, यानी निजी ठेकेदारों के बजाय शराब की खुदरा बिक्री सरकार के माध्यम से होती है। यह मॉडल राज्य की शराब बिक्री को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने और राजस्व में बढ़ोतरी के उद्देश्य से लागू किया गया था।
2. राजस्व का मुख्य स्रोत
शराब की बिक्री छत्तीसगढ़ में एक प्रमुख राजस्व स्रोत है। सरकार ने 2024-25 के लिए शराब से 11,000 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व का लक्ष्य तय किया है, जो राज्य की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। शराब नीति से अर्जित राजस्व का उपयोग सरकार के विकासात्मक परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों में किया जाता है।
3. शराब की दुकानों का सरकारी प्रबंधन
छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री का पूरा प्रबंधन राज्य सरकार के हाथ में होता है। सरकार शराब की बिक्री की मात्रा, कीमत, और गुणवत्ता की निगरानी करती है। हर जिले में सरकारी दुकानों के माध्यम से शराब की बिक्री होती है, जिससे अवैध बिक्री और तस्करी पर लगाम लगाई जा सके।
4. अवैध शराब बिक्री पर रोकथाम
राज्य सरकार की शराब नीति के अंतर्गत अवैध शराब बिक्री पर सख्त रोकथाम की कोशिश की जाती है। इसके लिए राज्य में विशेष दल गठित किए गए हैं, जो अवैध शराब उत्पादन और तस्करी की निगरानी करते हैं। यह कदम लोगों को जहरीली और अवैध शराब के खतरों से बचाने के लिए उठाया गया है।
5. नशामुक्ति अभियानों को प्रोत्साहन
हालांकि राज्य सरकार शराब की बिक्री से राजस्व अर्जित करती है, लेकिन नशामुक्ति अभियानों को भी बढ़ावा देती है। कई गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और सरकारी संस्थाओं के माध्यम से नशामुक्ति और शराब के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाई जा रही है।
6. महिलाओं का विरोध और सामाजिक मुद्दे
शराब नीति को लेकर राज्य में समय-समय पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में। इन क्षेत्रों की महिलाएं शराब के दुष्प्रभावों के कारण इसके खिलाफ आंदोलन कर चुकी हैं। उनका मानना है कि शराब की वजह से घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी और सामाजिक समस्याएं बढ़ रही हैं। इन मुद्दों को देखते हुए सरकार ने नशामुक्ति कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया है।
पुरानी और नई नीति में अंतर:
| पैरामीटर | पुरानी नीति (2018-2023) | नई नीति (2024) |
|---|---|---|
| दुकानों की संख्या | नियंत्रित लेकिन नए लाइसेंस जारी होते रहे | कोई नई दुकान नहीं खुलेगी |
| बिचौलियों की भूमिका | लाइसेंसधारी बिचौलिए सक्रिय | बिचौलियों की भूमिका समाप्त |
| राजस्व अर्जन | ₹5,500-₹6,000 करोड़ वार्षिक | ₹6,500 करोड़ का लक्ष्य |
| पारदर्शिता | सीमित | 100% पारदर्शी प्रक्रियाएँ |
महत्वपूर्ण चुनौतियाँ और समाधान
चुनौतियाँ:
- अवैध शराब की बिक्री का खतरा।
- शराबबंदी की मांग का बढ़ता दबाव।
- सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ।
समाधान:
- अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए सख्त कानून लागू किए जाएंगे।
- राजस्व का उपयोग सामाजिक सुधार कार्यक्रमों में किया जाएगा।
- चरणबद्ध तरीके से शराबबंदी की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
विशेष जानकारी:
- राज्य सरकार ने अपनी शराब नीति के तहत साल 2024-25 के लिए 11,000 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है
- नई नीति के तहत शराब घोटाले में लिप्त अधिकारियों और बिचौलियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ की नई शराब नीति राज्य में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नीति के तहत न केवल राजस्व में वृद्धि का लक्ष्य है, बल्कि समाज में शराब से जुड़ी समस्याओं को भी नियंत्रित करने की पहल की गई है।
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