“मनखे-मनखे एक समान” के संदेश के साथ फल-मिठाई वितरण
प्रत्येक वर्ष 20 अक्टूबर को विश्व सतनामी दिवस मनाने का लिया संकल्प
खबर वर्ल्ड न्यूज-संतोष पाठक-मुंगेली। प्रगतिशील सतनामी समाज के तत्वावधान में 20 अक्टूबर को विश्व सतनामी दिवस के अवसर पर वृद्धाश्रम में सेवा एवं फल-मिठाई वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाबा गुरु घासीदास जी के महान संदेश “मनखे-मनखे एक समान” को आत्मसात करते हुए समाज में समानता, मानवता, सेवा और सद्भाव की भावना को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा गुरु घासीदास जी की पूजा-अर्चना एवं श्रीफल अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सदस्यों ने मानव सेवा, सामाजिक समरसता और सतनाम पंथ के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। साथ ही, प्रत्येक वर्ष 20 अक्टूबर को विश्व सतनामी दिवस मनाने का संकल्प लिया गया, ताकि इस दिवस के महत्व और सतनामी समाज के ऐतिहासिक योगदान के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सके।
जिला अध्यक्ष अधिवक्ता जीवन लाल बंजारा ने कहा कि विश्व सतनामी दिवस हमें मानवता, समानता और सेवा के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर हमें एक-दूसरे की सेवा करने, जरूरतमंदों की सहायता करने और समाज में प्रेम एवं भाईचारे की भावना को मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सतनामी धर्मगुरुओं एवं महापुरुषों द्वारा दिए गए समानता, सामाजिक जागरूकता और मानव कल्याण के संदेश को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने की आवश्यकता है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और सेवा भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर वृद्धाश्रम में निवासरत हितग्राहियों को फल एवं मिठाई वितरित की गई। समाज के सदस्यों ने वृद्धजनों के साथ आत्मीय समय बिताकर उनके प्रति सम्मान, संवेदना और अपनत्व का भाव व्यक्त किया।
कार्यक्रम के पश्चात सभी सदस्य गुरु घासीदास चौक पहुंचे, जहां बाबा गुरु घासीदास जी की पूजा-अर्चना कर समाज एवं मानव कल्याण की कामना की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर पी.आर. पात्रे, प्रीतम घृतलहरे, व्यास सोनवानी, बेदराम चतुर्वेदी, एच.आर. भास्कर सहित प्रगतिशील सतनामी समाज के सदस्य एवं वृद्धाश्रम के समस्त हितग्राही उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से समाज ने यह संदेश दिया कि बाबा गुरु घासीदास जी के विचारों को सच्चे अर्थों में अपनाने का मार्ग मानव सेवा, समानता, आपसी सद्भाव और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता से होकर गुजरता है।


