रात 1 बजे तक चला कवि सम्मेलन साहित्य समागम मे जुटे विभिन्न जिले के साहित्यकार
खबर वर्ल्ड न्यूज-आशीष कंठले-बेमेतरा। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित साहित्यिक महासंगम के प्रथम दिवस शनिवार क़ो सांयकालीन भाषाविद डॉ चितरंजन कर ने कहा कि सरल रहना ही सबसे कठिन है। सरल लिखना बहुत कठिन कविता की भाषा मौन है छत्तीसगढ़ी हिंदी की बहन है। बोलियों से भाषा बनती है। हास्य के पीछे करुणा रहती है। जहां जगदीश सोनी के द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया। तृतीय सत्र का संचालन आशुतोष आनंद दुबे के द्वारा किया गया। वक्ता डॉ संजीव तिवारी ने बताया कि आईआईटी हैदराबाद मे छत्तीसगढ़ी भाषा विकास क़ो लेकर एआई और भाषा संबंधित कार्य किया जा रहा है जिसमें यू ट्यूब रिल्स आदि वीडियो के डाटा क़ो लेकर उसे छत्तीसगढ़ी भाषा हेतु डाटा कलेक्शन का कार्य किया जा रहा है। डॉ अंकुर शुक्ला ने भी ए आई क़ो लेकर अपनी बात कही। डॉ. हितेश तिवारी ने एआई से मौलिकता क़ो खतरा बताया और छत्तीसगढ़ी क़ो डिजिटल प्लेटफार्म मे लाना है। शरद यादव हर्ष ने कहा कि ए आई के अंतर्गत सही बात सही लिखना है ए आई से सोच समझ कर बात करें। वरिष्ठ साहित्यकार छत्तीसगढ़ मित्र के वर्तमान सम्पादक डॉ सुधीर शर्मा ने छत्तीसगढ़ी साहित्य क़ो लेकर तन मन धन से समर्पित होने की बात कही। जिसके बाद रात 1 बजे तक कवि सम्मेलन चलता रहा जिसमे लगभग 160 कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के मंच से भिन्न भिन्न विधाओं मे दीया। कवि सम्मेलन की खास बात यह रही कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा भी कवियों के बिच बैठ कर रात 1 बजे तक उनकी रचनाएँ सुनते रहे।
रविवार की सुबह छत्तीसगढ़ी व्याकरण और शब्दकोष क़ो लेकर चर्चा प्रारम्भ हुई जिसमे भाषा विज्ञान पर कार्य करने वाले देवधर महंत,डॉ. संध्या रानी शुक्ला, अरविन्द मिश्र, डॉ विनोद वर्मा, जैसे विद्वानों ने सरगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। जिसमे डॉ विनोद वर्मा ने कहा कि आम जनता जो कहेगी वही भाषा बनेगी और उसे स्वीकार करना पड़ेगा। शब्द ही भाषा की अर्थव्यवस्था है। सत्र के अध्यक्ष डॉ चितरंजन कर ने कहा कि कोई भी भाषा सरल अथवा कठिन नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ी भाषा एक महासागर है। यदि भाषा क़ो सुरक्षित रखना है तो शिक्षा क़ो आधार बना दो। भाषा एक शरीर है व्याकरण उसकी अस्थि पंजर है शब्दकोष मांस मज्जा है तो साहित्य उसकी सांसे हैं।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के द्वारा आयोजित 10 वें प्रांतीय अधिवेशन मे रविवार दोपहर क़ो जिले पत्रकारों क़ो छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, सचिव डॉ अभिलाषा बेहार, जिला समन्वयक रामानंद त्रिपाठी,पदम्लोचन शर्मा, के द्वारा सम्मानित किया गया जिसमे वरिष्ठ पत्रकार किशोर तिवारी,दिनेश दुबे, संजय दुबे, आमीन पप्पू रवानी, युवराज मिश्रा, योगेश राजपूत, विकास कश्यप का नाम शामिल रहे।
जिसके बाद सातवें सत्र मे छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य और अनुवाद परंपरा क़ो लेकर काफ़ी गहन एवं विस्तार पूर्वक चर्चा हुई जिसकी अध्यक्षता श्रीमती सरला शर्मा के द्वारा किया गया। संचालन श्री अजय अमृतांशु ने किया। वक्ता के रूप मे श्रीमती शकुंतला तरार, श्री रामनाथ साहू, श्री कुबेर साहू, श्री दादुलाल जोशी, श्री ईश्वर साहू ‘आरुग’ जैसे सिद्धहस्त साहित्यकार मौजूद रहे। रामनाथ साहू ने गद्य के नाट्य विधा पर कुबेर साहू ने गद्य के अनुवाद परम्परा पर दादुलाल जोशी तथा ईश्वर साहू ‘आरुग’ ने छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य पर बात रखते हुए अपनी भाषा के शब्दों का अधिकाधिक उपयोग करने पर बल दिया । सरला शर्मा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में बताया कि गद्य क्या है और इसका अनुवाद क्यों आवश्यक है और किस प्रकार के गद्य का अनुवाद होना चाहिए ।
छत्तीसगढ़ी मे बाल साहित्य पर भी चर्चा हुई जिसकी अध्यक्षता डॉ. अनुसुईया अग्रवाल के द्वारा किया गया। संचालन,श्री काशीपुरी कुंदन के द्वारा किया गया।वक्ता के रूप मे श्री कन्हैया साहू ‘अमित’, श्री चम्पेश्वर गोस्वामी, श्री रमेश चौहान आदि मौजूद रहे।
साहित्य के महासंगम मे दूसरे दिवस भी छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा, सचिव डॉ अभिलाषा बेहार, आदर्श दुबे, सुषमा गौराहा, पदम्लोचन शर्मा मुँहफट, रामानंद त्रिपाठी, गोकुल बंजारे चंदन, मशहूर हास्य कवि कृष्णा भारती, धर्मेंद्र डहरवाल हरहा, गीतकार राम कुमार साहू, पंकज शर्मा, निधि साहू, गायत्री श्रीवास, राम हृदय नारायण प्रसाद वर्मा चंदन, जगदीश सोनी, सुरेश सरल, हृदय लाल विश्वकर्मा, मनोज पाटिल, भुवन दास जांगड़े ईश्वर निषाद, ताकेश्वर साहू, नरेन्द्र साहू, मिलन मलरिहा, मुकेश साहू, धर्मेंद्र जंघेल, मनीराम मितान, नरेन्द्र वर्मा अरमान चोवाराम बादल मोहन वर्मा विकास कश्यप, मनोज पाटिल, किशोर तिवारी, विजय मिश्रा अमित सहित भारी संख्या मे साहित्यकार मौजूद रहे।


